apaan-mudra

मुद्राओं का जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रा दो तरह की होती है पहली जिसे आसन के रूप में किया जाता है और दूसरी हस्त मुद्राएँ होती है। मुद्राओं से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ प्रस्तुत है अपान मुद्रा की विधि और लाभ।

अपान मुद्रा : मध्यमा और अनामिका दोनों को आपस में मिलाकर उनके शीर्षों को अँगूठे के शीर्ष से स्पर्श कराएँ। बाकी दोनों अँगुलियों को सीधा रखें।

अपान मुद्रा के लाभ : इस मुद्रा को करने से मधुमेह, मूत्र संबंधी रोग, कब्ज, बवासीर और पेट संबंधी रोगों में लाभ मिलता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह मुद्रा लाभदायक बताई गई है। अपान वायु का संबंध पृथ्वी तत्व और मूलाधार चक्र से है।

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