दिल को दुरुस्त रखने में अलसी का उपयोग काफी कारगर साबित होता है। अनियमित खानपान व वसा युक्त खाने से दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड रक्त नलिकाओं में वसा के जमाव को रोकता है। अलसी के बीज से बनी चीजें दिल के रोग दूर करने में काफी मददगार हैं।

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अलसी का तेल वसा रहित

अलसी का तेल वसा रहित होता है इसलिए इसमें बना खाना आपको दिल के रोगों से दूर रखता है।अलसी का तेल व बीज कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ हृदय संबंधी अन्य रोगों से बचाता है। अलसी का तेल एनजाइना व हाइपरटेंशन से भी बचाता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड

यह एसिड हर्ट अटैक के खतरे को कम करता है। यह धमनियों के फैलाव में मदद करता है जिससे उनमें रक्त का प्रवाह सही ढंग से हो सके, लेकिन ओमेगा-3 फैटी एसिड हमारे शरीर में नहीं बनता है इसे भोजन के ही ग्रहण करना होता है। शाकाहारियों के लिए अलसी ओमेगा-3 एसिड का का सबसे अच्छा स्रोत है क्योंकि मांसाहारियों को तो यह एसिड मछली से मिल जाता है।

फाइबर का स्रोत अलसी

फाइबर खाने से वसा में कमी आती है जो कोलेस्ट्रोल कम करने में मदद करता है। साथ ही फाइबर से आपको प्यास बहुत ज्यादा लगती है इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।

कोलेस्ट्रोल की समस्या

दिल को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है कि आपका कोलेस्ट्रोल लेवल कम हो। अलसी के बीज रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रोल की मात्रा को बढ़ाता है और खराब कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है।

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ब्लड क्लॉट का खतरा कम

अलसी के बीज के लगातार सेवन से दिल की धमनियों में ब्लड क्लॉट की समस्या नहीं होती है। जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम रहता है ।

कैसे सेवन करे

  • अलसी को किसी एयरटाइट डिब्बे में ही रखें। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए हवा नुकसादायक होती है। हवा के संपर्क में आते ही ओमेगा-3 फैटी एसिड नष्ट होने लगता है।
  • अलसी के बीज को हल्की आंच पर थोड़ा भून लें। इसमें थोड़ी सौंफ और अजवाइन मिला लें। चाहें तो काला नमक और नींबू भी स्वादानुसार मिला सकते हैं। भोजन के बाद सुबह शाम और दोपहर में एक-एक चम्मच ले सकते हैं।
  • अलग अलग प्रकार की चटनियों में भी इसे मिला कर खाया जा सकता है।
  • पीसी हुई अलसी को सब्जी अथवा दाल में डाल कर भी खाया जा सकता है।
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