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रज मुद्रा केवल स्त्रियों के लिए है ऐसा नहीं, बल्कि अगर पुरुष इस मुद्रा को करते हैं तो उनके वीर्य संबंधी समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

रज मुद्रा की मुद्रा विधि : रज मुद्रा बनाना बहुत ही आसान है। कनिष्ठा (छोटी अंगुली) अंगुली को हथेली की जड़ में मोड़कर लगाने से रज मुद्रा बन जाती है।

रज मुद्रा के लाभ : रज मुद्रा से स्त्रियों के मासिक धर्म संबंधी रोग दूर होते हैं। इसके अलवा सिर में भारीपन रहना, छाती में दर्द, पेट, पीठ, कमर का दर्द आदि रोग भी रज मुद्रा करने से दूर हो जाते हैं। स्त्री के सारे प्रजनन अंगों की परेशानियों को ये मुद्रा बिल्कुल दूर कर देती है।

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