स्वीट पोटैटो यानी शकरकंद का सेवन सर्दियों में लाभदायक होता है क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं।
शकरकंद में आयरन, फोलेट, कॉपर, मैगनीशियम, विटामिन्‍स आदि होते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनता है। इसको खाने से त्‍वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्‍दी झुर्रियां नहीं पड़ती।शकरकंद के सेवन से आंखों की रौशनी बढती  है। इसके साथ ही इसमें बीटा कैरोटीन होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल्‍स से लड़ता है और जल्‍द बुढापा नहीं आने देता।

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तो आइये जानते हैं इसके स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में-

कैंसर से बचाए

शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में अच्‍छी मात्रा में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में होता है। ऐसे आहार जिसमें अधिक कैरोटिनॉयड पाया जाता है, वह फेफड़े और मुंह के कैंसर से बचाता है।

एक शोध के परिणामों के अनुसार यदि रोज शकरकंद खाया जाए तो महिलाओं में स्तन कैंसर होने की संभावनांए २५% कम हो जाती है। जापानी वैज्ञानिकों के एक अध्धयन के अनुसार शकरकंद का जूस स्तन कैंसर होने पर कैंसर कोशिकाओं की वृद्दि रोकता है और नयी कैंसर कोशिकाओ के बनने के क्रम को रोकता है।

ब्‍लड शुगर कंट्रोल करे

यह एक सपुष्पक पौधा है। अगर आपको का ब्‍लड शुगर लेवल कुछ भी खाने से तुरंत ही बढ जाता है तो, शकरकंद खाना ज्‍यादा अच्‍छा होता है। इसे खाने से ब्‍लड शुगर हमेशा नियन्‍त्रित रहता है और इंसुलिन को बढने नहीं देता।

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विटामिन डी से भरपूर

विटामिन डी थायरॉयड ग्रंथि, दांत, हड्डियों, नसों और त्वचा के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक होता है। शकरकंद में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है, इसलिए यह शरीर के पोषण के लिए अच्छा होता है।

पेट के अल्सर का इलाज

अगर आप पेट के अल्‍सर से पीड़‍ित हैं तो आप जितनी जल्‍दी हो सके अपने आहार मे शकरकन्‍द को श‍ामिल करें। इसमें मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन, विटामिन बी, पोटेशियम और कैल्शियम अल्सर की आशंका को कम करता है।

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दिल की बीमारी से बचाए

शकरकंद में विटामिन बी6 होता है जो शरीर में रासायनिक होमोसिस्टीन बनने से रोकता है और हार्ट अटैक से बचाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्‍लड प्रेशर और दिन के कार्य को मेंटेन करता है।

तनाव से राहत दिलाए

इसमें हाई पोटैशियम पाया जाता है जिससे तनाव में आने के बाद शरीर प्रयोग कर लेता है, इसलिये शकरकंद को जरुर खाना चाहिये। साथ ही यह मासपेशियों की ऐठन कम करता है जो कि पोटैशियम की कमी से होता है।

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एंटी-इंफ्लेमेटरी

शकरकन्‍द में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्‍व आंतरिक और बाहरी सूजन जैसे हार्टबर्न, एसिडिटी और गठिया के इलाज करने में सहायक होता है। अगर आपको भी इस तरह की कोई भी समस्‍या है तो शकरकन्‍द के नियमित इस्‍तेमाल से ठीक हो सकती हैं।

इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनता है

शकरकंद में आयरन, फोलेट, कॉपर, मैगनीशियम, विटामिन्‍स आदि होते हैं, जिससे इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनता है। इसको खाने से त्‍वचा में चमक आती है और चेहरे पर जल्‍दी झुर्रियां नहीं पड़ती।

श्वास संबंधी रोग

नियमित रूप से एक शकरकन्‍द का सेवन शरीर के लिए विटामिन ए की जरूरत का 90 प्रतिशत पूरा करता है। विटामिन ए फेफड़ों के रोग जैसे वातस्फीति के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

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दिल की धड़कन को नियंत्रित

पोटेशियम से समृद्ध शकरकन्‍द दिल की धड़कन और तंत्रिका संकेतों को नियंत्रित करने में सहायक होता है। साथ ही पोटेशियम किडनी के कार्यों को नियंत्रित करने, सूजन को करने और मांसपेशियों में ऐंठन को समाप्त करने में भी मदद करता हैं।

प्रदर रोग (ल्‍यूकोरिया)

शकरकन्‍द प्रदर रोग में लाभकारी होता है। प्रदर रोग होने पर शकरकन्‍द को जिमीकन्‍द में बराबर मात्रा में लेकर छाया में सुखाकर और पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके 5-6 ग्राम चूर्ण को ताजे पानी और शहद में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।

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कोलेस्‍ट्रॉल नहीं होता है

शकरकंद ऐसे खाद्य पदार्थों में से एक जिसमें कैलोरी और स्टार्च औसत मात्रा में होता है। शकरकंद में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्‍ट्रॉल बिल्‍कुल भी नहीं होता है और यह आहार फाइबर, एंटी ऑक्‍सीडेंट, विटामिन और मिनरल का समृद्ध स्रोत है।

प्रतिरक्षण बढ़ाता है

आयरन शरीर में एनर्जी के स्‍तर को बनाए रखने में मदद करता है और शकरकन्‍द में आयरन भरपूर मात्रा में होता है इसलिए यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, शकरकन्‍द सफेद और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में सुधार करता है।

सूजन

शकरकंद में पाए जाने वाले कोलाइन नामक तत्व को शरीर के लिए बहुत अहम माना जाता है। यह तत्व नींद, मांसपेशियों की गतिशीलता, सीखने तथा याद रखने में मदद करता है। ये तत्व कोशिका के आवरण के ढांचे को मेंटेन करने में मदद करता है। नर्व इम्पल्स के ट्रांसमिशन में मदद करता है। वसा के अवशोषण को सहायता प्रदान करता है और असाध्य सूजन को कम करता है। शकरकंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व आंतरिक और बाहरी सूजन जैसे हार्टबर्न, एसिडिटी और गठिया के इलाज में सहायक होते हैं।

सावधानियाँ

किडनी रोगी ना खाएं शकरकंद

अगर आपकी किडनी सही तरह से काम नहीं कर पा रही हो, या आप किसी क्रोनिक किडनी के रोग से पीडि़त हैं, तो शकरकंद न खाएं, क्योंकि शकरकंद में पोटेशियम की अच्छी खासी मात्रा होती है। जब किडनी रक्त में मिले पोटेशियम को अलग नहीं कर पाती है, तो यह पोटेशियम शरीर के लिए घातक बन जाता है।

 

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