कैल्शियम हमारे शरीर का महत्वपूर्ण घटक है। कार्बन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के बाद शरीर में कैल्शियम की मात्रा सबसे अधिक होती है। हड्डियों और दांतों की संरचना के अलावा कैल्शियम का कुछ भाग रक्त में भी घुला होता है, जो शरीर की प्रक्रियाओं को सही ढंग से चलाने में मुख्य किरदार निभाता है।

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यह सिर्फ हड्डियों को ही मजबूत नहीं बनाता, बल्कि उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से दूर रखने में भी मददगार साबित होता है। रक्त में घुला कैल्शियम नर्वस सिस्टम के माध्यम से हमारी मांसपेशियों को गतिशील और कोशिकाओं को सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। खासतौर से गर्भावस्था के दौरान गर्भस्थ शिशु की हड्डियों के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

अनाज में : गेहूँ, बाजरा व रागी।

जड़ व कंद में : नारियल का गुड़, शकरकंद (रतालू)।

दूध व दूध के सभी पदार्थ।

दालों में : मूँग दाल, राजमा, सोयाबीन, चना, मोठ।

हरी सब्जियों में : कढ़ी पत्ता, पत्ता गोभी, अरबी के पत्ते, सुरजने के पत्ते, मैथी, मूली के पत्ते, पुदीना हरा, धनिया, ककड़ी, सेम ग्वारफली, गाजर, भिंडी, टमाटर।

मेवों में : मुनक्का, बादाम, पिस्ता, अखरोट व तरबूज के बीज।

फलों में : नारियल, आम, जामफल, सीताफल, संतरा, अनन्नास।

मसालों में : अजवाइन, जीरा, हींग, लौंग, धनिया, कालीमिर्च।

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ये सभी प्राकृतिक रूप से कैल्शियम प्रदान करने वाले तत्व हैं। ये पदार्थ तुरंत शरीर द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं। माँ का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम कैल्शियमयुक्त रसायन है, जो उनमें कैल्शियम की पूर्ति और रोगों से मुक्ति दिलाता है। शरीर को प्रतिदिन 0.8 से 1.3 ग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है।

कैल्शियम की कमी के उपचार

जिन कारणों से शरीर में कैल्शियम की कमी हो रही है, उनको दूर कर प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत निम्न उपचार करना चाहिए-

  • पाचन संस्थान को ठीक करने के लिए पेडु पर मिट्टी की पट्टी, गरम-ठंडा कटि स्नान, धूप स्नान, गीली चादर लपेटना, एनिमा लेना आदि लाभकारी हैं।
  • अपनी रुचि के अनुसार घर के कार्य जैसे साफ-सफाई, बागवानी, तैराकी, पैदल चलना, भवनों में लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का उपयोग करना आदि।
  • नियमित योगाभ्यास करना।
  • आहार के संबंध में विशेष रूप से सतर्क रहें। फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, तला-भुना, मिर्च-मसाला, मैदे तथा शकर से बने पदार्थों से बचें। प्राकृतिक आहार जैसे अंकुरित अनाज, मौसम के ताजे फल व सब्जियाँ, सलाद, मोटे आटे की रोटी, डेयरी प्रोडक्ट को अपने आहार में विशेष स्थान दें।