मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण घेरलू उपाय है केरला

मधुमेह के रोगी के लिए करेला रामबाण से कम नहीं हैं। इसकी सब्जी जूस और विशेषकर इसका चूर्ण इस रोग में बहुत लाभकारी हैं। करेला अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्त्राव को बढ़ाता हैं। करेले में इन्सुलिन प्रयाप्त मात्रा में होती हैं। यह इन्सुलिन मूत्र एवं रक्त दोनों ही की शर्करा को नियंत्रित रखने में समर्थ हैं। आइये जाने मधुमेह में इसके विभिन्न प्रयोग जिनको इस्तेमाल करने से डायबिटीज जैसी भयंकर बीमारी से राहत पायी जा सकती हैं।

1. करेले का जूस।
4 करेलो का जूस बिना छिलका उतारे, निकाल कर पुरे दिन में तीन हिस्सों में बाँट कर सौ ग्राम पानी में मिलाकर नित्य तीन बार करीब तीन महीने तक पिलाना चाहिए। आधा कप करेले के रस में आधा निम्बू निचोड़े, आधा चम्मच राई व् स्वादानुसार नमक तथा चौथाई कप पानी मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता हैं।

2. करेले की सब्जी।
खाने में भी करेले की सब्जी बिना छिलका उतारे बनानी चाहिए।

3. करेले का चूर्ण।
जब करेले का मौसम हो तो 20 किलो अच्छे करेले धो कर साफ़ कर के फिर इनके छोटे छोटे टुकड़े करके छाया में सुख ले। सफाई का धयान रखे करेले सूख जाने पर पीसकर ऐसे बर्तन में रखे जिस पर तर, गर्म हवाओ का प्रभाव नहीं हो, अर्थात एयर टाइट जार में रखे। इस पाउडर की एक एक चम्मच सुबह दोपहर शाम तीन टाइम ठन्डे पानी से फंकी लेते रहे। मधुमेह में बहुत लाभ होगा। करेले को सुखाकर रखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते।

विशेष।
मधुमेह रोग में करेला कम से कम 4 महीने तक सेवन करे। और इसका सेवन खाली पेट करना चाहिए। और इसके सेवन के आधे घंटे तक कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए। इस से मधुमेह के साथ साथ रक्त शुद्धि भी होती हैं।

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