मधुमेह (शुगर, डायबिटीज) से बचना हो,
वजन (मोटापा) कम करना हो,
कैंसर से बचना हो,
हार्ट अटैक से बचना हो
तो सफ़ेद चावल खाना बंद करे, भूरा चावल खाएं.

धान चावल जब खेत में से काटा जाता है तब उसको धान कहते हैं.
भूरा चावल (brown rice) उस धान से उपरी परत (छिलका) निकाला जाता है.
सफ़ेद चावल (white rice) भूरे परत की सफाई की जाती है और उस की पोलिश की जाती है.

 

brown-vs-white-rice

ब्राउन चावल unpolished चावल , चोकर , रोगाणु और एण्डोस्पर्म घटक को 100 % बरकरार रखती है जो एक पूरा अनाज है . ब्राउन चावल बाहरी भूसी हटाने के बाद धान से तैयार होता है और अपने सभी वनस्पति घटकों और पोषक तत्व को रखता है . भीतरी एण्डोस्पर्म स्टार्च में समृद्ध है, जबकि बाहरी परत ( चोकर ) और भूरे रंग के चावल के रोगाणु या भ्रूण , प्रोटीन , वसा , आहार फाइबर , विटामिन और खनिजों से समृद्ध होती हैं .

आम तौर पर पॉलिश चावल ( सफेद चावल ) अपनी बेहतर organoleptic ( उपस्थिति , स्वाद , स्वाद , सुगंध और बनावट ) विशेषताओं के लिए पसंद किया जाता है. सफेद चावल बनाने में ब्राउन चावल कि पूरी मिलिंग और चमकाने की विधि में विटामिन बी 3 के 67% , विटामिन बी 1 की 80 % , विटामिन बी -6 की 90 % , मैंगनीज का आधा , फास्फोरस का आधा , लोहे का 60%, आहार फाइबर और आवश्यक फैटी एसिड के सभी खटक को नष्ट कर देता है . पूरी तरह से milled और पॉलिश सफेद चावल में विटामिन बी 1 , बी 3 और लोहे को ऊपर से डालकर enrich किया जाता है.

सफ़ेद चावल यानी रासायनिक चावल.

हमारा मानना है कि सफेद चावल और दूसरे पॉलिश किए अनाज की जगह भूरे चावल जैसे संपूर्ण अनाज लेने चाहिए जिससे टाइप 2 मधुमेह की आशंका को कम किया जा सके। भूरे चावल में सफेद चावल की तुलना में ज्यादा रेशे होते हैं। उनमें खनिज, विटामिन की मात्रा भी ज्यादा होती है और खाने के बाद ब्लड-शूगर का स्तर भी सफेद चावल की तुलना में कम बढ़ता है।

भारत में हुए एक और ट्रायल के दौरान अधिक वजन / मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में जब सफेद चावल के सेवन की तुलना ब्राउन राइस से की गई तो, पाया गया कि इन लोगों में सफेद की जगह ब्राउन का सेवन करने से ग्लूकोज का स्तर और सीरम इंसुलिन में कभी आई। व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस के सेवन से ग्लूकोज 20 प्रतिशत तथा इंसुलिन में 60 प्रतिशत की कटौती होती है।

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