खानपान सम्बंधी शौक बढ़ने के चलते मोटापा जैसी बीमारी हमें बुरी तरह से घेर रही है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि खानपान महज शौक नहीं रहा। तनाव, अवसाद आदि समस्याओं से निपटने के लिए भी लोग खानपान का ही सहारा लेते हैं। नतीजतन ओवरईटिंग जैसी परेशानियां सामने आ खड़ी होती हैं। कुछ लोगों के मुताबिक ओवरईटिंग कोई समस्या नहीं है बशर्ते आपको डायबिटीज या मोटापे जैसी बीमारी न हो। आपको बताते चलें कि यह निरानिर ख्वाबख्याली है। जी, हां! ओवरईटिंग न सिर्फ डायबिटीज और मोटापे के मरीजों के लिए ही परेशानी का सबब है वरन ओवरईटिंग शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए हानिकारक है खासकर लीवर, किडनी, फेफड़ा आदि। विशेषज्ञों की मानें तो जो ओवरईटिंग के शिकार होते हैं, उनके लीवर सहज तरीके से काम करने बंद कर देते हैं। सवाल उठता है ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए? यह जानने के लिए आगे पढ़ते हैं।

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लीवर क्यों जरूरी है

लीवर वसा को पचने में मदद करता है। साथ ही लीवर, पित्त के माध्यम से घुलनशील विटामिन को वसा में स्रावित करता है। यही नहीं लीवर ब्लड ग्लुकोज का स्तर नियंत्रित रखता है और कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म में मदद करता है। शरीर के आवश्यक कोम्पोनेंट बनने में भी लीवर की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। लीवर में ही तमाम किस्म के विटामिन मसलन ए, बी12, डी, ई और के, के साथ साथ कई मिनरल भी स्टोर होते हैं। अतः अब आप समझ गए होंगे कि लीवर का सही ढंग से काम करना शरीर के लिए क्यों आवश्यक है।

लीवर पर ओवरईटिंग का प्रभाव

ओवरईटिंग या अत्यधिक वसायुक्त आहार लेने से वेसेल्स में सामान्य से अधिक वसा जम जाती है। इसी कारण लीवर के लिए सहजता से काम करना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन शरीर में टाक्सिक की मात्रा बढ़ जाती है। ओवरईटिंग के कारण तोंद भी बढ़ जाती है जो कि शरीर को बेढंगा और अनाकर्षक बना देती है। इसके अलावा यदि आपके खानपान में पशु की वसा अधिक है तो ध्यान रखें कि इससे लीवर की आर्टरीज़ मोटी हो जाती हैं जिससे गैलस्टोन होने की आशंका में बढ़ोत्तरी होती है। यही नहीं नित्य ओवरईटिंग करने से वसा को पचने में समस्या आने लगती है और मोटापा किसी बीमारी की तरह फैलने लगता है।

क्या करें

खानपान

लीवर सम्बंधी समस्या सुनकर यह न सोचें कि वसायुक्त आहार को पूरी तरह बंद कर दिया जाए। हां, आपको चाहिए कि ओवरईटिंग पर नियंत्रण करें। जो मन को हो, वो अवश्य खाएं लेकिन कम मात्रा में। इसके अलावा कोशिश करें कि वसायुक्त आहार कम से कम लें। अपने खानपान में ऐसे आहार शामिल करें जो लीवर के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। यदि आप डायबिटीज या मोटापे के मरीज हैं तो किसी विशेषज्ञ की सलाह से अपने डायट चार्ट बनाएं। विशेषज्ञों के मुताबिक ठूसकर यानी पेट भरकर खाना न खाएं। कम खाएं; लेकिन ज्यादा बार खाएं। इससे लीवर को अतिरिक्त काम नहीं करना पड़ता और न ही वसा के जमने की आवश्यकता होती है।

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जीवनशैली

अगर आप मोटे हैं या फिर ओवरईटिंग का शिकार हैं तो अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इससे छुटकारा पा सकते हैं। निःसंदेह यह थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन ध्यान रखें कि मोटापे को मात देना और स्वस्थ जीवन यापन करना है तो जीवनशैली में बदलाव आवश्यक है। सवाल है जीवनशैली में किस प्रकार के बदलाव जरूरी है? इसमें तमाम किस्म के बदलाव शामिल हैं मसलन पूरी नींद, व्यायाम, खानपान आदि।

एक्सरसाइज करें

अगर आप ओवरईटिंग करते हैं और नियमित एक्सरसाइज भी करते हैं तो निश्चित ही ओवरईटिंग आपके शरीर को कम प्रभावित करेगी। हां, इस बाबत आप अपने ट्रेनर से अवश्य सलाह लें कि एक्सरसाइज करते हुए किन आहार को नजरंदाज करना जरूरी है। एक्सरसाइज का मतलब यह नहीं है कि आपका जो मन आएगा, खाएंगे। संभव हो तो एक्सरसाइज को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं। इंस्ट्रक्टर की मदद लें। ध्यान रखें कि एक्सरसाइज कभी भी लापरवाही से न करें क्योंकि बात आपकी लीवर की है।

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जब कुछ न हो

यदि ओवरईटिंग के कारण आपका लीवर बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। खासकर यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं तो लापरवही कतई न करें। तुरंत डाक्टर के पास जाएं। वे जो भी दवा दें, उसे समय पर लें। इतना ही नहीं जीवनशैली से लेकर खानपान तक में डाक्टर के कहे मुताबिक बदलाव करें। याद रखें कि यदि स्वस्थ जीवन जीना है तो डाक्टर की अनदेखी करना सही नहीं है। इससे आपकी बीमारी घातक रूप इख्तियार कर सकती है।

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