अंजीर सर्दियों में शरीर के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। यह पेट से जुड़ी समस्याओं में रामबाण की तरह करती है। अंजीर में आयरन की मात्रा भी होती है। जो एनीमियां के इलाज में मददगार साबित होता है। अंजीर में रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। इसमें पानी 80 प्रतिशल, प्रोटिन 3.5 प्रतिशत, वसा 0.2, कार्बोदित पदार्थ 18.7 प्रतिशत, रेशे 2.3 प्रतिशत क्षार, 0.7 प्रतिशत, कैल्शियम 0.06 प्रतिशम, फॉस्फोरस 0.03 , लौह 1.2 मिग्रा।

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अंजीर में सोडियम के अलावा पोटेशियम, कैल्शियम, लौहे, तांबा , मेगनेशियम, फॉस्फोरस, सल्फर और क्लोरिन पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ताजे अंजीर में विटामिन ए अत्याधिक पाया जाता है। जबकि विटामिन बी और सी सामान्य होता है। ताजे अंजीर की तुलना में सूखे अंजीर में शर्करा और क्षार तीन गुना अधिक पाया जाता है।

अंजीर के फायदे

एनीमिया

अंजीर में आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण यह एनीमिया में लाभप्रद होता है। 10 मुनक्के और 8 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर पी लें। इससे रक्त में वृद्धि और रक्त सम्बन्धी विकार दूर हो जाते है।

कब्ज

3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात को सोने से पहले खाएं। और उसके बाद वही दूध पी लें। इससे कब्ज में लाभ होता है या 4 अंजीर को रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह थोड़ा सा मसलकर पानी पीने से कब्ज दूर हो जाती है।

दमा

दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।

प्यास की अधिकता

बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।

दांतों का दर्द

अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं।

पेशाब का अधिक आना

3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।

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गिल्टी

अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।

हाइपरटेंशन की समस्या

कम पोटैशियम और अधिक सोडियम लेवल के कारण हाइपरटेंशन की समस्या पैदा हो जाती है। अंजीर में पोटैशियम ज्यादा होता है और सोडियम कम होता है इसलिए यह हाइपरटेंशन की समस्या होने से बचाता है।

दाद

अंजीर का दूध लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

खांसी

अंजीर का सेवन करने से सूखी खांसी दूर हो जाती है। अंजीर पुरानी खांसी वाले रोगी को लाभ पहुंचाता है क्योंकि यह बलगम को पतला करके बाहर निकालता रहता है।

बवासीर

3-4 सूखे अंजीर को शाम के समय पानी में डालकर रख दें। सुबह अंजीरों को मसलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट खाने से बवासीर दूर होती है।

जुकाम

पानी में 5 अंजीर को डालकर उबाल लें और इसे छानकर इस पानी को गर्म-गर्म सुबह और शाम को पीने से जुकाम में लाभ होता है।

हड्डियों को मजबूत

अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है। आपको बस केवल दिन भर में 4-5 अंजीर खाना होगा और फिर इससे लाभ हो जाएगा।

गले के भीतर की सूजन

सूखे अंजीर को पानी में उबालकर लेप करने से गले के भीतर की सूजन मिटती है।

क्षय यानी टी.बी के रोग

इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।

फोड़े-फुंसी

अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।

प्रदर रोग

अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।

कमर दर्द

अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।

दुर्बलता (कमजोरी)

पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।

अंजीर को दूध में उबालकर

उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।”

फोड़ा (सिर का फोड़ा)

फोड़ों और उसकी गांठों पर सूखे अंजीर या हरे अंजीर को पीसकर पानी में औटाकर गुनगुना करके लगाने से फोड़ों की सूजन और फोड़े ठीक हो जाते हैं।

सर्दी (जाड़ा) अधिक लगना

लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में अंजीर को खिलाने से सर्दी या शीत के कारण होने वाले हृदय और दिमाग के रोगों में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है।

त्वचा के विभिन्न रोग

कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।अंजीर का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं। बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।”

जीभ की सूजन

सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।

पेचिश और दस्त

अंजीर का काढ़ा 3 बार पिलाएं।

श्वासरोग

अंजीर और गोरख इमली (जंगल जलेबी) 5-5 ग्राम एकत्रकर प्रतिदिन सुबह को सेवन करने से हृदयावरोध (दिल की धड़कन का अवरोध) तथा श्वासरोग का कष्ट दूर होता है।

मसूढ़ों से खून का आना

अंजीर को पानी में उबालकर इस पानी से रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे मसूढ़ों से आने वाला खून बंद हो जाता है तथा मुंह से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।

तिल्ली (प्लीहा) के रोग में

अंजीर 20 ग्राम को सिरके में डुबोकर सुबह और शाम रोजाना खाने से तिल्ली ठीक हो जाती है।

प्रसव के समय की पीड़ा

प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

कैंसर से रक्षा करता है

एन्टीऑक्सिडेंट गुण से भरपूर अंजीर फ्री-रैडिकल्स के क्षति से डी.एन.ए. की रक्षा करता है जिससे कैंसर होने की संभावना कुछ हद तक कम हो जाती है।

जख्म को सही करने में

किसी प्रकार का जख्म हो जाने पर भी अंजीर जा उपयोग किया जाता है।अंजीर का लेप बनाकर जख्म वाली जगह पर लगाने से जख्म जल्दी ही ठीक हो जाता है। इस लेप को बनाने के लिए सूखे अंजीर को दूध में पीस ले। इसका पुल्टिस बनाकर जिस जगह पर जख्म हुआ है उस पर बांध दे। जल्दी ही जख्म ठीक हो जायेगा। ताजे अंजीर को कुटकर जख्म पर लगाने से भी जख्म जल्दी ठीक हो जाता है।

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