स्वस्थ, सुंदर और शक्तिशाली शरीर मानव की सर्वोत्तम संपत्ति है। स्वस्थ व सुंदर शरीर का निर्माण हमारे भोजन पर निर्भर करता है। हम जो भोजन लेते हैं उससे हमारे शरीर को आवश्यक दैनिक क्रियाओं के संपादन हेतु ऊर्जा प्राप्त होती है, यह बात सभी जानते हैं कितु 80 प्रतिशत लोग यह नहीं जानते कि हमारा आहार कैसा होना चाहिए और आहार कैसे लेना चाहिए।

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जी हां, आहार करने के भी नियम होते हैं, सीमाएं होती हैं। जैसे भोजन सदैव प्रसन्न मुद्रा में व आराम से खाना चाहिए। यदि आप थके हुए हैं, अत्यधिक चिंतित हैं, क्रोध में हैं तो खाना खाने से बेहतर होगा उस समय भूखे ही रह जाएं क्योंकि जितना लाभ उस भोजन से होगा उससे कहीं अधिक दुष्प्रभाव आप पर पड़ेंगे। इसी प्रकार शारीरिक श्रम करनेवाले व्यक्तियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है जबकि हल्का शारीरिक श्रम या मानसिक कार्य करनेवाले व्यक्तियों को हल्का व सुपाच्य भोजन करना ही श्रेयस्कर रहता है।

गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करानेवाली महिलाओं और बढ़ते हुए बच्चों को ज्यादा आहार की जरूरत होती है। एथलीटों और अधिक वजनवाले व्यक्तियों को कम आहार का सेवन करना चाहिए। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार है लेकिन उसमें लोहे की कमी होती है, जिसे बाहर से पूरक आहार देकर पूरा किया जा सकता है। मां का दूध बच्चों को जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति देता है।

पौष्टिक आहार की कमी से कई प्रकार के दुष्परिणाम सामने आते हैं। शरीर नाना-प्रकार की व्याधियों से घिर जाता है। अत: पौष्टिक पदार्थों से युक्त भोजन का नियमित सेवन हमें समस्त रोगों से बचाए रखता है।

प्रोटीन

हमारे विकास व स्वास्थ्य के लिए प्रोटीन एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। प्रोटीन द्वारा हमारे शरीर का नवनिर्माण होता रहता है। यदि भोजन में प्रोटीन की कमी हो जाए तो विकास-क्रम रुक जाता है। शरीर को स्वस्थ रखने, उसे विकसित करने, लंबाई तथा भार बढ़ाने के लिए प्रोटीन की प्रबल आवश्यकता होती है। नेशनल रिसर्च काउंसिल ऑफ ब्रिटेन ने एक व्यक्ति के लिए उतने ही ग्राम प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता बताई है जितने किलोग्राम उसके शरीर का वजन हो। अर्थात किसी व्यक्ति का वजन 60 कि.ग्रा. है तो उसे नित्य 60 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होगी।

प्रोटीन का प्रमुख कार्य दैनिक कार्यों में हुई शारीरिक क्षति की पूर्ति करना तथा शरीर के थके तंतुओं को स्फूर्तिवान बनाना है। प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत दूध, पनीर, मुर्गी, मछली व अंडे माने जाते हैं। इसके अलावा दालें, सोयाबीन, अनाज, मूंगफली, तिल, काजू, खजूर, मेथी, जीरा, गाजर की पत्ती, सहजन में भी प्रोटीन प्रचुर मात्रा में मिलता है।

कार्बोहाइड्रेट

शरीर को शक्ति तथा गर्मी पहुंचाना ही कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख कार्य है। जिस प्रकार ईंधन जलकर गर्मी देता है ठीक उसी तरह कार्बोहाइड्रेट भी शरीर को गर्मी प्रदान करता है। इस गर्मी को ‘कैलोरी’ में मापा जाता है। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट से 4.1 कैलोरी मिलती है। शारीरिक श्रम करनेवाले व्यक्ति को मानसिक कार्य करनेवाले व्यक्ति से अधिक कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत आलू, आटा, मेकरोनी, चावल व चीनी हैं।

वसा

हमारे शरीर के लिए वसा शक्ति का खजाना है। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की जितनी मात्रा से जितनी शक्ति प्राप्त होती है उतनी ही वसा की मात्रा से दुगनी से भी अधिक शक्ति प्राप्त होती है। शरीर की लगभग 25 प्रतिशत ऊर्जा की आवश्यकता वसा द्वारा ही पूरी की जाती है। शक्ति का खजाना होने के अतिरिक्त शरीर में वसा के कई अन्य उपयोग भी हैं, जैसे त्वचा की सुंदरता व चमक, चर्म रोगों से बचाव, मांसपेशियों को दृढ़ बनाना, बाहरी तापमान के आकस्मिक परिवर्तन से शरीर का बचाव करना। दूध, दही, मक्खन, मलाई, अजवाइन, जीरा व धनिया आदि वसा प्राप्ति के प्रमुख स्रोत हैं।

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खनिज लवण

भोजन में जिस प्रकार प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व वसा की जरूरत होती है उसी प्रकार शरीर के लिए खनिज तत्त्वों की भी प्रबल आवश्यकता होती है। खनिज लवण प्रमुख रूप से 18 प्रकार के माने जाते हैं कितु हमें इनमें से कैल्शियम  व लौह तत्त्वों की अधिक आवश्यकता होती है। कैल्शियम  प्रमुखत: हड्डियों के निर्माण में सहायक होता है। यह दूध, दही, गुड़, सुपारी, नीबू, किशमिश, सोयाबीन, भिंडी, अरहर, इलायची तथा पनीर में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

लौह तत्त्व रक्त को शक्ति प्रदान करते हैं तथा रक्त की कमी पूर्ति के साथ-साथ उसका रंग लाल बनाए रखते हैं। इस तत्त्व की शरीर को दैनिक आवश्यकता केवल 20 से 30 मि.ग्रा. है। लौह तत्त्व प्रमुखत: गेहूं, उड़द, चना, सरसों, मेथी, पालक, चने की पत्ती, काली मिर्च, धनिया, हल्दी, पिस्ता, सहजन तथा नीम फुनगी में पाया जाता है।

कोबाल्ट, तांबा, फास्फोरस, सोडियम आदि खनिज लवणों की भी शरीर को जरूरत होती है जो साधारणतया ताजा हरी सब्जियों से पूरी हो जाती है।

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