बाग्वट जी ने एक सूत्र लिखा हैं, “दुनिया का सबसे बड़ा औषधि केंद्र हमारा रसोई घर” अब दुर्भाग्य से हम रसोई में जिनको मसाला कहते हैं, वह मसाला कुछ नहीं हैं सब औषधि हैं. मसाले का और औषधि का फर्क मालुम हैं, यह मसाला तो शब्द ही भारत का नहीं हैं, यह अरबी शब्द हैं. हिंदुस्तान में जब में 17वी 18वी शताब्दी का इतिहास पड़ता हूं तो जब तक मुग़लों का राज्य रहा तब तक मसाले शब्द का उपयोग ज्यादा हुआ. मुग़लों के राज्य के पहले एक भी जगह मसाला शब्द का उपयोग नहीं किया जाता था. चरक संहिता पढ़ीं मेने कहीं भी मसाला शब्द नहीं हैं उसमे.

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  • तो इनके जो गुण हैं, रसोई घर के यह सब आपकी चिकित्सा के लिए हैं. अब मुझे समज में आता हैं की हमारे पुराने ज़माने की माताए हैं, जो हमारी दादी हैं, नानी हैं इन्होने अपनी-अपनी बेटियों को जो कुछ सिखाया सब्जी बनाना तो क्या-क्या डालना हैं, जीरा चाहिए, धनिया चाहिए, मात्रा कितनी-कितनी होनी चाहिए आदि सभी बड़े ही जबरदस्त बताये हैं.
  • यह सब बड़े वैज्ञानिक और चिकित्सक लोग रहे होंगे. क्योंकि रोज हमारे शरीर में वात, कफ, पित्त की स्थिति सम और असम होती रहती हैं. आप जानते हैं सुबह जो हेना वात ज्यादा रहता हैं शरीर में, दुपहर को पित्त ज्यादा रहता हैं, शाम को कफ ज्यादा रहता हैं तो ये पुरे 24 घंटे में ऊपर निचे होता रहता हैं.

यह जो 24 घंटे में वात पित्त कफ ऊपर निचे होता रहता हैं, तो सब्जियों में उसी के हिसाब से औषधियां डाली जाती हैं. जैसे दुपहर की सब्जी बनाई, तो मेने मेरी दादी को देखा था की दुपहर की सब्जी बनाएगी तो अजवाइन जरूर डालेगी उसमें. और वही सब्जी रात को बनती थी तो अजवाइन नहीं डालती थी.

तो एक दिन मैने दादी से पूछा की “यही सब्जी दुपहर को मैंने खाई तो अजवाइन थी, और शाम को मैने खाई तो अजवाइन नहीं थी, ऐसा क्यों? तो उन्होंने मुझे उत्तर तो नहीं दिया, पर यह कह दिया की मुझे मेरी मां ने ऐसा ही सिखाया था. बस बात खत्म हो गई. अब उस समय मैने भी मान लिया की ठीक हैं उनकी मां ने सिखाया होगा.

लेकिन अब जब मैंने काम शुरू किया यह आयुर्वेदिक चिकित्सा पर तब मेरे समझ में आया की अजवाइन जो हैं पित्तनाशक हैं. देसी घाय के घी के बाद जो सबसे ज्यादा पित्तनाशक दूसरी चीज हैं तो वह हैं “अजवाइन”. और दुपहर को पित्त बढ़ता हैं, और वह स्वाभाविक हैं खाना खाने के लिए पित्त बढ़ना ही चाहिए तो उस समय अजवाइन डाली जाती हैं सब्जी में, क्योंकि दुपहर को ही शरीर को अजवाइन की ज्यादा जरुरत होती हैं. यह पित्त को सम पर लाती हैं.

वात पित्त कफ तो भारत में ज्यादातर माताए व बहने यह बात जानती हैं की दुपहर की सब्जी में अजवाइन चाहिए. दुपहर का दही हेना दही का मट्ठा उसमे भी अजवाइन का बगार लगता हैं. दुपहर की जितनी भी चीजें हैं उनमे ज्यादातर अजवाइन ही मिला हुआ होता हैं.

तो आप सोचो जो लोग यह कर रहे हैं, वह बिना कहे कितना बड़ा काम कर रहे हैं. हमने उसका Valuation नहीं किया, यह हमारी मूर्खता हैं. हमारे यहां तो एक बहुत बड़ा दुष्कर्म एक हुआ हैं, अंग्रेजों के हम गुलाम हो गए, तो सब कुछ हम भूल गए अपनी चीजें. अंग्रेजों ने हमे जो सिखाया बस वही अब याद हैं. चलो इस बात को फिर कबि करेंगे पहले वात पित्त कफ का घरेलु उपचार के बारे में बात करते हैं (राजीव दीक्षित)

  • तो किसी को भी गैस बनती हो तो अजवाइन का सेवन करे. पेट में एसिडिटी की तकलीफ हो आदि आज से शुरू कर दो आप. खाना खाया तो उसमे अजवाइन ज्यादा रहे यह याद रखे. और अगर आप खाने में अजवाइन नहीं मिला सकते तो खाना खाने के बाद थोड़ी अजवाइन खाये.

पेट की गैस के लिए सबसे आसान और रामबाण उपाय

  • अजवाइन ज्यादा तकलीफ नुकसान न कर दे इसके लिए आप काले नमक का उपयोग भी करे. तो थोड़ा अजवाइन और काला नमक खाना खाने के बाद खाकर देख लें. तीन दिन में जो आपकी गैस बंद न हो तो जो आप कहे वह में करने को तैयार हूं. ये guarantee में नहीं दे रहा, यह गारंटी अजवाइन दे रही हैं.
  • वात पित्त कफ बाग्वट जी इस विषय में कहते हैं अजवाइन पित्त को सम रखने के लिए हमारे रसोई में देसी घी के बाद दूसरी विशेष चीज हैं वह हैं अजवाइन. अब तीसरी चीज पर आते हैं, पित्त के लिए अजवाइन के बाद जो तीसरी चीज आती हैं जीरा. जीरा दौ तरह का हैं एक सफ़ेद एक काला.
  • इसमें काला जीरा सफ़ेद से भी अच्छा होता हैं. आप एक नियम ध्यान में रखलो. मैने आपसे एक बार कहां था “जिस चीज का जितना रंग गहरा वह उतनी ही अच्छी, भगवान की बनाई हुई, मनुष्य की नहीं” मनुष्य ने तो पेंट भी बनादिया हैं, वह तो और भी गहरा रंग का होता हैं. भगवान् की बनाई हुई हर चीज में यह नियम आप देख लें. प्राकृतिक रूप से जो चीज जितने गहरे रंग की हैं उसकी quality उतनी ही अच्छी होगी.

पित्त को ख़त्म करने का इलाज अजवाइन

  • तो जीरा दो हैं एक सफ़ेद, एक काला. जिसमे काला जीरा सबसे अच्छा पित्त को सम रखने के लिए तो आपके रसोई में एक हो गया घी (देसी गाय का पित्त को ख़त्म करने के लिए), दूसरा हो गया अजवाइन, तीसरा हो गया हींग. हींग तो आप सब समझते ही होंगे. हींग तो भगवान की बनाई हुई हैं किसी आदमी ने नहीं बनाई. हींग के पहाड़ होते हैं जैसे पत्थर के पहाड़ होते हैं ठीक वैसे ही. हींग वही से आती हैं. तो हींग हैं, अजवाइन हैं, जीरा हैं, और देसी गाय का घी हैं. अब इसके निचे आता हैं धनिया.
  • धनिया भी दो तरह का हैं, सूखा और एक हरा. जब तक हरा उपलब्ध हैं आप यही खाइये, जब नहीं हैं तब सूखा धनिया ही खाइये. दोनों की quality एक ही हैं. सूखे धनिया में कोई कमी नहीं आती. आपके मन में यह प्रश्न होगा धनिया के हरे पत्ते में गुण ज्यादा होंगे सूखे में कम होंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं है सूखा और हरा दोनों तरह की धनिये में बराबर गुण होते हैं.
  • धनिये के सूखने के बाद भी उसके गुण धर्म में कोई कमी नहीं होती. और ऐसी पूरी एक लिस्ट हैं, मैंने तो आपको सिर्फ 5-6 बता दिये. यह तो पूरी लिस्ट हैं जो की 108 हैं. क्या आप जानते हैं पित्त को ख़त्म करने के लिए रसोई में 108 चीजें हैं.

कफ का इलाज आसान है

  • अब बारी आती हैं कफ का इलाज की . कफ के लिए मैंने आपको पहले भी बताया की इसके लिए सबसे अच्छी चीज हैं गुड़. गुड़ के बाद दूसरे नंबर हैं शहद, (अगर आप जैन धर्म के हैं तो शायद मत खाइये) तीसरी चीज हैं सोंठ. सोंठ का ही एक दूसरा रूप हैं “अदरक”. अदरक से अच्छी हैं सोंठ. कारण क्या हैं – अदरक जब सुख जाती हैं तब ही सोंठ बनती हैं. और अदरक के सूखने के बाद उसके गुण और बढ़ जाते हैं.
  • अदरक के सूखने के बाद उसका गुण लगभग 100 गुना बढ़ जाता हैं. इसलिए सोंठ अदरक से हमेशा ही अच्छी हैं. तो कफा ख़त्म करने के लिए रसोई घर में पहला हो गया गूढ़, दूसरा शहद, तीसरा सोंठ. अब चौथी चीज जो भी बहुत अच्छी हैं, वह हैं पान. पान यानी पान का पत्ता. जो आप पान खाते हेना, यह कफा ख़त्म करने के लिए अतिउत्तम औषधि हैं.
  • कफ का इलाज में जो पान गहरे रंग का हो उसी का उपयोग करे, इसे आप देसी पान भी कह सकते हैं. ज्यादा गहरे पाना कफा को ख़त्म करने लिए बहुत ही जबरदस्त चीज हैं. और पान और सोंठ का बेस्ट कॉम्बिनेशन हैं. पान खा रहे हैं तो उसमे सोंठ डालकर खा सकते हैं, अदरक डाल कर खा सकते हैं. जो जो चीजें पान में डाली जाती हैं वह सभी कफानाशक होती हैं.
  • पान बनाने वाले सब बाग्वट जी के चेले हैं, बिना जाने यह काम कर रहे हैं. गुलकंद आपको पान में डालकर दे रहे हैं. सौफ भी डाली जाती हैं यह भी कफनाशक होती हैं, लौंग भी इसमें डालते हैं, लौंग अलग से भी खाई जा सकते हैं, सौंफ भी खाई जा सकती हैं, गुलकंद भी खा सकते हैं, यह सभी कफानाशक हैं बहुत बेहतरीन उपचार करेंगी.

वात का उपचार

  • अब बारी आती हैं वात का इलाज की  वात पर सबसे अच्छी चीज होती हैं तेल, शुद्ध तेल. शुद्ध तेल वातनाशक हैं, और अब जो दूसरी बात में कह रहा हूं “जिन चीजों में भी पानी की मात्रा ज्यादा हो वह सभी वातनाशक हैं, जैसे दूध, आप जानते हैं दूध में तो सबसे ज्यादा पानी ही हैं न. दूध को फाड़ के देख लो, सॉलिड मटेरियल तो थोड़ा ही निकलता हेना बाकि तो पानी ही रह जाता हैं. अब समझ आगया होगा की दूध में पानी ज्यादा होता हैं.
  • बाग्वट जी ने वात पित्त कफ के लिए यह सूत्र ऐसे लिखा हैं, पानी युक्त चीजें सभी वातनाशक हैं. तो वात का इलाज लिए पहला दूध हो गया, तीसरा दही हो गया, दही में भी पानी ही होता हैं. इसके बाद बारी आती हैं छाछ की, छाछ में भी पानी ही होता हैं. इसके अलावा सभी तरह के फलों के रस भी वातनाशक हैं. सभी रस जैसे संतरे का, मोसम्बी का, गन्ने का, इसमें गन्ने का तो और भी अच्छा हैं. इसके अलावा अंगूर का, टमाटर का आदि का उपयोग भी कर सकते हैं, यह सभी वातनाशक हैं.

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