अवसाद के प्रभावों को अकसर हम मा‍नसिक स्‍वास्‍‍थ्‍य से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह शारीरिक रूप से भी बहुत कष्‍ट देने वाला होता है। कई शारीरिक तकलीफों के पीछे भी अवसाद हो सकता है।

अवसाद का शरीर पर असर

हम अवसाद यानी डिप्रेशन के भावनात्‍मक प्रभाव से तो परिचित हैं। लेकिन, शायद आपको इस बात का अंदाजा न हो कि अवसाद के साथ कई शारीरिक लक्षण भी जुड़े होते हैं। दरअसल, अवसाद से पीड़ित कई लोग तेज दर्द और अन्‍य कई शारीरिक परेशानियों से चिंतित रहते हैं।

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पाचन संबंधी समस्‍या

अवसाद का असर आपकी पाचन क्रिया पर भी पड़ता है। इसके कारण आपको मिचली या उबकाई हो सकती है। इसके साथ ही आपको डायरिया अथवा कब्‍ज की परेशानी भी हो सकती है।

सिरदर्द

अवसादग्रस्‍त लोगों में सिरदर्द सामान्‍य लक्षण है। अगर आप पहले से माइग्रेन से पीडि़त हैं, तो अवसाद के कारण इसके लक्षण और बुरे हो सकते हैं। कहने का अर्थ यह है कि अवसाद सिरदर्द के लक्षणों को और बढ़ा देता है।

चक्‍कर आना या सिर घूमना

हालांकि यह लक्षण कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के कारण हो सकता है, इसलिए अधिकतर अवसादग्रस्‍त व्‍यक्तियों को कोई सहायता नहीं मिल पाती। दरअसल, वे समझ ही नहीं पाते कि अवसाद के कारण शरीर पर कौन से प्रभाव पड़ते हैं। कई बार डॉक्‍टर भी इन लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते।

कमर दर्द

अवसाद के इस असर के बारे में शायद आपने सोचा भी न हो, लेकिन डिप्रेशन आपको कमर और पीठ दर्द की शिकायत भी दे सकता है। और अगर आप पहले से कमर या पीठ के दर्द से परेशान हैं, तो डिप्रेशन आपकी परेशानी में इजाफा कर सकता है।

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भूख या वजन में बदलाव

अवसाद से पीड़ित कुछ लोगों के वजन और भूख में परिवर्तन हो जाता है। उनकी भूख और वजन कम हो जाते हैं। वहीं कुछ लोगों को कोई खास आहार अधिक पसंद आने लगता है। वे कार्बोहाइड्रेट और मीठे का सेवन अधिक करते हैं जिससे उनका वजन बढ़ने लगता है।

जोड़ों में दर्द

अगर आपकी मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द में लगातार दर्द रहता है और कई ईलाज करवाने के बाद भी अगर आपको इसका अपेक्षित परिणाम न मिल रहा हो, तो संभव है कि आपके इस दर्द की वजह डिप्रेशन हो।

सीने में दर्द

सीने में दर्द होने पर आपको फौरन किसी चिकित्‍सक से संपर्क करना चाहिये। यह हृदय, पेट, फेफड़े या अन्‍य समस्‍याओं का संकेते हो सकता है। लेकिन, अवसाद के कारण भी सीने में दर्द व असहजता हो सकती है।

अनिद्रा

डिप्रेशन के शिकार अधिकतर लोग अच्‍छी नींद नहीं ले पाते। वे रात को करवटें बदलते रहते हैं और सुबह बहुत जल्‍दी उठ जाते हैं। अवसाद के कारण वे दिन में भी थके-थके रहते हैं।

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थकान

आप कितना भी सो लें, आपको फिर भी थकान और आलस महसूस हो। सुबह पलंग से उठना मुश्किल, बल्कि कई मायनों में असंभव जान पड़े, तो यह डिप्रेशन के अधिक प्रभाव के कारण हो सकता है।

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