कान के बाहर के हिस्से की तरफ छोटी सी सूजन वाली गांठें पैदा हो जाती हैं उन्हें ही कान के बाहर की फुंसियां कहते हैं।

उपचार

1. नीम :

  • नीम के पत्तों को पीसकर कान की फुंसियों पर बांध दें। इसको सूख जाने के बाद खुद इसे ना हटाए बल्कि फुंसियों के ठीक हो जाने के बाद यह अपने आप ही हट जाता है।
  • नीम के तेल को कान की फुंसियों पर लगाने से लाभ मिलता है। अगर फुंसियों में जलन भी हो तो नीम के तेल के बराबर ही तिल का तेल मिलाकर फुंसियों पर लगाने से आराम मिलता है।

2. नींबू : नींबू के रस में करंज के बीज को मिलाकर रोजाना 2-3 बार फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।

3. कुलिंजन : कुलिंजन पकाकर तेल बना लें। इस तेल को कान की फुंसियों पर लगाने से आराम आता है।

4. कमल कन्द (शालूक) : कमल कन्द (शालूक) को पीसकर फुंसियों पर लगाने से फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

5. आक : आक (मदार) की जड़ की छाल को पीसकर लगाने से कान की फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

6. चकबड़ (पवार) : चकबड़ (पवार) के बीजों को नींबू के रस के साथ पीसकर कान की फुंसियों पर लगाने से फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

7. बघण्डी : बघण्डी के दूध को कान के बाहर की फुंसियों, दाद और एक्जिमा पर लगाने से लाभ मिलता है।

8. कलिहारी : कलिहारी को पीसकर लगाने से कान के बाहर की फुंसियां समाप्त हो जाती हैं।

9. जलपीपल : जलपीपल को पकाकर बने हुए तेल को रोजाना 2-3 बार लगाने से कान के बाहर की फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

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