विटामिन को जीवन तत्व भी कहा जाता है। यह शरीर को रोगों से बचने की शक्ति प्रदान करते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने व शरीर की रासायनिक प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपादित करने के लिए 15 प्रकार के विटामिनों की आवश्यकता होती है। इनमें से केवल विटामिन-डी ही हमारे शरीर में निर्मित होता है, बाकी विटामिनों के लिए हम खाद्य पदार्थों पर ही निर्भर रहते हैं। विटामिनो के महत्व और उनके फायदों के बारे हम आपको बता रहें –

विटामिन ‘ए’

यह विटामिन दूध, मक्खन, हरी व पीली पत्तीवाली सब्जियों तथा पीले फलों में प्रमुखता से पाया जाता है। सब्जियों में यह ‘केरोटिन’ के रूप में पाया जाता है। बच्चों के विकसित होते शरीर को इनकी प्रबल आवश्यकता होती है। इसकी कमी से आंखों के रोग, अंधापन, फोड़े-फुसी,जुकाम, खांसी व कान के रोग हो जाते हैं। फलों में यह पका आम, गाजर, पपीता, खजूर, काजू, अंजीर, केला, संतरा व अंजीर में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

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विटामिन ‘बी’

शरीर को स्वस्थ रखने तथा उसकी पाचनक्रिया ठीक रखने के लिए इस विटामिन की आवश्यकता होती है। इसकी कमी से भूख बंद हो जाती है तथा अतिसार हो जाता है। नसों में सूजन आ जाती है तथा व्यक्ति ‘बेरी-बेरी’ रोग का शिकार हो जाता है। स्नायु कमजोर पड़ जाते हैं तथा लकवा हो जाता है। कभी-कभी इस विटामिन की कमी से हृदयघात भी हो जाता है। यह विटामिन खमीर,चावल की भूसी, चोकर, दालों के छिलके, अंकुरित अनाज के अतिरिक्त दूध, ताजी सब्जी, आटा व खाद्यान्नों में प्रमुखता से पाया जाता है। फलों में यह सहजन, गाजर, चुकदर, मूंगफली, अदरक, किशमिश, केला, खीरा व काजू में प्रचुरता से पाया जाता है।

विटामिन ‘सी’

यह विटामिन कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है। इसकी कमी से जुकाम, खांसी, मसूड़ों तथा दांतों व त्वचा के रोग हो जाते हैं। पेट में अल्सर हो जाता है तथा अंदर की झिल्लियों से रक्त बहने लगता है।

आंवला इस विटामिन की प्राप्ति का सबसे उपयुक्त माध्यम माना जाता है। एक छोटे आवले में लगभग 2 संतरों के जितना विटामिन ‘सी’ पाया जाता है। आवले में यह भी विशेषता होती है कि उसे सुखाने या पकाने पर भी उसका विटामिन बहुत कम मात्रा में नष्ट होता है। इसके अलावा यह पत्तागोभी, संतरा, नीबू, अनन्नास, अनार, पका आम, शकरकद, मूली, बैंगन व प्याज में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

विटामिन ‘डी’

विटामिन ‘डी’ का विशेष महत्त्व है। छोटे बच्चों के लिए यह विशेष रूप से जरूरी होता है। बच्चे इसकी कमी से रिकेट्स नामक रोग से ग्रस्त हो जाते हैं, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं, टांगें कमजोर व विकृत हो जाती हैं। विटामिन ‘डी’ की कमी से दांतों का विकास भी ठीक तरह से नहीं हो पाता है।

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सूर्य की किरणे इस विटामिन की प्राप्ति का सबसे उपयुक्त साधन हैं। इसलिए इस विटामिन की प्राप्ति के लिए बच्चों को नित्य नंगे बदन कुछ समय तक धूप में रखना चाहिए। तिल के तेल की मालिश के बाद धूप-स्नान किया जाए तो विशेष लाभ होता है। इसके अलावा दूध, मक्खन, मलाई, मूंगफली व तिल में भी विटामिन ‘डी’ पाया जाता है।

विटामिन ‘ई’

विटामिन ‘ई’ शरीर में लाल रक्तकणों के निर्माण में सहायक होता है। यह विटामिन ‘सेक्स’ से संबंधित है। इसकी कमी से महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती। बार-बार गर्भपात होना इसी विटामिन की कमी का परिणाम माना जाता है।यह विटामिन अनाज  में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

विटामिन ‘के’

रक्त का थक्का बनाने का कार्य यह विटामिन करता है। यह विटामिन हरी सब्जियों में प्रमुखता से पाया जाता है।

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