यह हिमालय की तलहटी में प्राकृतिक रूप से भी उगता है। धतूरे को उगाना बिलकुल भी कठिन नही है क्योंकि इसे ज्यादा देखरेख की जरूरत नही होती है।

  • धतूरे के कुछ औषधीय उपयोग भी हैं जो इसे आयुर्वेद के लिए उपयोगी बनाते हैं। इस पौधे में लकड़ी सा डंठल और सफ़ेद या बैगनी रंग के फूल होते हैं।

इस पौधे का फूल बहुत खुशबूदार होता है और सिर्फ रात को ही महकता है। इस पौधे में फल भी होते है पर ये ना तो खाने योग्य होते है न दवा के योग्य।

धतूरे का औषधीय उपयोग :

  1. धतूरा अस्थमा के इलाज के लिए उपयुक्त माना गया है। धतूरे की पत्तियों को जला कर उनका धुआँ लेने से यह रोग ठीक होता है। पारंपरिक रूप से धतूरे की पत्तियों को रोल करके धुआँ लेन से अस्थमा का इलाज होता है।
  2. धतूरे का फल मलेरिया बुखार के कुछ प्रकारों को ठीक करने के काम में भी लाया जाता है। हालांकि यह खाने योग्य नही होता पर इसके कुछ हिस्सों का उपयोग उपचार में किया जाता है। इसके फल को जला कर प्रयोग में लाया जाता है। इसका उपयोग करने से पहले किसी जानकार की सलाह अवश्य लें।
  3. धतूरे की पत्तियों का प्रयोग बहुत से ह्रदय रोगों में किया जाता है।
  4. धतूरे के बीजों का प्रयोग गंजेपन में भी किया जाता है। धतूरे के बीज का तेल निकाल कर गंजी जगहों पर लगाने से बाल आने लगते है। यह बहुत अधिक विषाक्त होता है। इसका सेवन किसी हाल में ना करें।
  5. इसके फल के रस को सप्ताह में एक बार सिर पर लगाने से रूसी और झड़ते हुए बालों से छुटकारा मिलता है। इससे नये बाल जड़ में से निकल आते है।
  6. इसका बढ़ता हुआ पौधा कीटाणु रोधी होता है जो आस पास लगे अन्य पौधों को भी कीटाणुओं से बचाता है।

Note : इसका रस आंख कान और मुँह पर ना लगने दे यह हानिकारक हो सकता है, कृपया यह सावधानी जरूर रखे।

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