एक औषधि जो ह्रदय को बना देगी लोहे जैसा मजबूत कभी नहीं होगी हार्ट की बीमारी

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हम आपको एक ऐसी चमत्कारिक औषधि के बारे में बतायंगे जिसका प्रयोग अगर आप कर लेंगे तो आपको जीवन में कभी भी दिल से जुडी कोई बी बीमारी नहीं होगी और अगर कोई बीमारी है तो भी बिलकुल सही हो जाएगी ये नुस्खा आपके दिल को बना देगा लोहे जैसा मजबूत. यह औषधि न सिर्फ ह्रदय के लिए बल्कि कैंसर और अस्थमा के रोग में भी रामबाण तरिके से काम करती है  इसका नाम है इंडियन स्कुइल (Indian squill) जो की Cardiotonic की श्रेणी में आती है इसका वैज्ञानिक नाम Urgenia Indica है इसके कंद को सुखाकर चूरण बनाकर उपयोग में लिया जा सकता है।

जंगली प्याज तीखा, छोटा और कटु (कडुवा) होता है। इसका पका हुआ फल खट्टा, उष्णवीर्य (गर्म प्रकृति वाला), कफ-वात को नष्ट करने वाला, पित्त को बढ़ाने वाला, कफ को बाहर निकालने वाला, हृदय की उत्तेजना को बढ़ाने वाला, पेशाब रोग को ठीक करने वाला, स्वेदजनक (पसीना लाने वाला), कृमिघ्न (पेट कीड़े को मारने वाला), सूजन को नष्ट करने वाला तथा उल्टी को बंद करने वाला होता है।

रोगों में सहायक :

1. पैरों के तलवों की जलन: ताजे जंगली प्याज को पत्थर पर घिसकर लेप बना लें और इस लेप को 2 बार पैरों के तलवे पर लगाने से लाभ मिलता है।

2. पैर में कांटा चुभना: इसकी जड़ को पीसकर गर्म करके पीड़ित स्थान पर बांधें। इससे पैर में चुभा कांटा निकल जाता है और दर्द भी समाप्त हो जाता है।

3. त्वचा के रोग: इसकी जड़ को पीसकर बनाया गया बारीक चूर्ण 200 मिलीग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें और बाहरी रूप से जड़ का रस 2-3 बार लगाएं। इससे त्वचा का रोग समाप्त हो जाता है।

4. जलोदर: पुनर्नवा के काढ़े में 200 मिलीग्राम जंगली प्याज के कंद का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम प्रतिदिन खाने से लाभ मिलेगा।

5. हृदय रोग: अर्जुन की छाल का चूर्ण और जंगली प्याज के कंद का चूर्ण दोनों को बराबर मिलाकर आधा चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम 1 कप दूध के साथ रोज़ लें। इससे हृदय रोगों में लाभ मिलता है।

6. चोट: इसकी ताजी जड़ बारीक पीसकर लेप बना लें और चोट पर लगाएं या चोट पर बाधें।

7. मासिक-धर्म अवरोध: जंगली प्याज की जड़ का चूर्ण, कलौंजी और अपामार्ग के बीजों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर, आधे चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सुबह-शाम रोज खायें।

8. गुर्दे के रोग: जंगली प्याज के कंद का चूर्ण, ककड़ी के बीज और त्रिफला का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर आधा चम्मच दिन में दो बार सुबह-शाम रोज खायें। इससे गुर्दे के रोग नष्ट हो जाते हैं।

9. मूत्रावरोध: पुनर्नवा के रस के साथ जंगली प्याज के कंद का चूर्ण 200 मिलीग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाएगी और पेशाब खुलकर आता है।

10. मूत्राघात: लगभग 600 मिलीग्राम से 1.20 ग्राम तक जंगली प्याज खाने से पेशाब से वीर्य का जाना दूर होता है।

 

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