अच्छा और बेहतर स्वास्थ्य पाने के लिए आवश्यक है हम कुछ नियमों का पालन करें | जिससे की हमारा शरीर सुन्दर सुडौल और बलशाली होगा और हम अधिक समय तक जिन्दा रहेंगे | इसे पाने के लिए आप निम्न नियमों का पालन करें –

  • सोते समय अपने पैर दक्षिण दिशा की ओर करके नहीं सोना चाहिए। इससे दिल व दिमाग पर दबाव पड़ता है-यह एक वैज्ञानिक सत्य है।
  • मल, मूत्र,छींक, जम्हाई, निंद्रा, उल्टी, डकार, भूख, प्यास अपान वायु, चलता हुआ शुक्र, आंसू तथा परिश्रम से उत्पन्न हुआ श्वास वेग-यह 13 अधारणीय वेग हैं। इन समस्त वेगों को रोकना अपने स्वास्थ्य पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।
  • आपकी उम्र कितनी भी हो, हालात कैसे भी हों हमेशा मानसिक शांति को बनाए रखने की कोशिश करें।
  • हमारा शरीर प्राणों के कारण ही जीवित है, हमारे शरीर में प्राणों के कारण ही शक्ति रहती है। इस शक्ति को बनाए रखने के लिए प्राणायाम आवश्यक है। इसलिए नित्य प्राणायाम करना उत्तम स्वास्थ्य की गारंटी है।
  • भोजन के बाद तुरंत सोना या परिश्रम करना हानिकारक है।
  • शीतकाल में प्रात:काल धूप का सेवन श्रेयस्कर होता है।
  • भोजन  को हमेशा चबा-चबाकर खूब महीन टुकडे करके खाएं |
  • भोजन कितना भी स्वादिष्ट क्यों न हो, क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए, आवश्यकता से अधिक भोजन हानिकारक होता है।
  • प्रतिदिन व्यायाम करना, स्नान करना, मालिश करना, धूप-स्नान करना, सुबह की सैर करना-ये स्वास्थ्य रक्षा के पांच महामंत्र हैं।
  • कई लोगों की आदत होती है कि वे भोजन करते समय व उसके पश्चात पेट भरकर पानी पी लेते हैं। यह सरासर गलत तरीका है, इससे भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो पाता तथा शरीर को उस भोजन की पचाने में ज्यादा शक्ति व्यय करनी पड़ती है। इसलिए भोजन करने के पश्चात दो घंटे तक तथा भोजन के दौरान पानी न पीने का नियम बना लें।
  • तंबाकू, सिगरेट, अफीम, गांजा, भांग व चरस इत्यादि का नशा जान का दुश्मन है। नशा करना अनेक बीमारियों को निमंत्रण देना है।
  • स्वस्थ रहने का मूलमंत्र पांच कार्यों में निहित है। यदि इन पांच कार्य यथा: प्रात: उठना, शौच करना, स्नान, भोजन व शयन को नियमित व ठीक समय पर किया जाए तो व्यक्ति सदैव स्वस्थ व निरोगी रहेगा।
  • शराब का ज्यादा सेवन हमेशा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए बेहतर होगा इसे हमेशा के लिए त्याग दिया जाए। किंतु यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो शराब को नशे की तरह नहीं दवा की तरह पीएं, कम पीएं व इसके बाद पौष्टिक आहार जरूर लें।
  • प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठना व उठते ही एक गिलास पानी पीना उत्तम स्वास्थ्य का रहस्य है।
  • स्वस्थ रहने के लिए जैसे समय पर पौष्टिक आहार लेना जरूरी है उसी प्रकार समय पर उचित नींद लेना भी जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे कम व ज्यादा नींद लेना दोनों स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक हैं।
  • गर्म जल से चेहरा धोना, आंखें धोना, स्नान करना व गुदा धोना हानिकारक है। इनके लिए सदैव शीतल जल का ही प्रयोग करना श्रेयस्कर होता है।
  • मांसाहार स्वास्थ्य का सबसे बड़ा शत्रु है। इससे स्वास्थ्य तो खराब होता ही है व्यक्ति के आचार-विचार भी हिंसक हो जाते हैं। मांसाहार करनेवाले व्यक्ति के शरीर से जानवर की भांति गंध आने लगती है। इसके साथ ही कई बीमारियां भी उसके साथ जुड़ जाती हैं-जैसे मोटापा, रक्तचाप, कैंसर, गठिया, मधुमेह, पित्त संबंधी व हृदय रोग संबंधी बीमारियां ।
  • भोजन करते समय शोक-चिंता व तनाव में न रहें। भोजन करते समय एकाग्र रहना चाहिए।
  • वस्त्रों का चुनाव करते समय हमेशा मौसम का ध्यान रखें, मौसम के अनुसार ही वस्त्रों का चयन करें।
  • देखे बिना जल पीना व हाथ धोए बिना भोजन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है।
  • उपवास स्वस्थ रहने का सरल उपाय है। सप्ताह में एक दिन उपवास अवश्य करें।
  • 50 वर्ष की आयु के बाद प्रोटीन अल्प मात्रा में ही लें तथा वसा लेना बिल्कुल बंद कर दें। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार 75 वर्ष की उम्र के पश्चात अनाज का सेवन बंद करके हरी-पीली सब्जियां, फल और फलों का रस भोजन में सम्मिलित किया जाए तो वृद्धावस्था में होनेवाले तमाम रोगों से बचा जा सकता है।
  • क्रोध, चिंता व शोक स्वास्थ्य के तीन शत्रु माने जाते हैं। यह स्वास्थ्य के साथ-साथ सौंदर्य को भी नष्ट कर देते हैं।
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