सामान्य उपचार

मिरगी के मरीज को दौरा आता है जिस दौरान उसके शरीर की गतिविधियां सामान्य नहीं रहती। इस दौरान अगर मरीज को सही उपचार ना मिले तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। मिरगी का दौरा आने पर निम्न उपाय अपनाने चाहिए:

​मिरगी के दौरे आने पर क्या करें?

  • मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर लिटा दें।
  • उसके आसपास से तेज, नुकीली या चुभने वाली वस्तुओं को हटा दें।झटकों को आने दिया जाये। जैसे ही झटके बंद हो जायें, मरीज को विश्राम की स्थिति में लिटा दें और उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाए।
  • याद रखिये, झटकों के दौरान मरीज में मुंह में कुछ न रखिये, अक्सर मरीज को दांतों पर दांत कसते देख लोग उसके मुंह में चम्मच या अन्य वस्तु रख देते हैं। मगर ऐसा करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है क्योंकि ऐसा वस्तु टूटकर सांस के रास्ते में जा सकती है या मरीज के दांत टूट सकते हैं।
  • कसे हुए या बाधा उत्पन्न करने वाले वस्त्रों को निकाल दें।
  • इस बीच चिकित्सक से संपर्क कर या तो उसे वहीं बुला लें या फिर मरीज को अस्पताल ले जाएं।

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मिरगी रोग के लिए घरेलू नुस्ख़े-

अंगूर का रस

मिरगी के मरीजों के लिए अंगूर का रस काफी फायदेमंद होता है। लगभग आधा किलो अंगूर का रस निकालकर सवेरे खाली पेट पीना चाहिए। इसे छह महीने तक आजमाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

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कद्दू

मिरगी के मरीजों के लिए कद्दू या पेठा सबसे कारगर घरेलू इलाज है। पेठे की सब्जी भी बनाई जाती है और आप इसकी सब्जी का भी सेवन कर सकते हैं, लेकिन इसका जूस रोज़ाना पीने से काफी फायदा होता है।

तुलसी के पत्तियां

तुलसी कई बीमारियों में रामबाण की तरह कम करता है। तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं। मस्तिष्क की किसी भी प्रकार की बीमारी में अगर रोजाना तुलसी के 20 पत्तियां चबाकर खाया जाए तो यह काफी असरदार होता है।

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मिट्टी का लेप

मिट्टी को पानी में गीला करके मरीज के पूरे शरीर लेप लगा दें। एक घंटे बाद नहा लें। इससे मिरगी के दौरे कम आएगे और मरीज थोड़ा बेहतर महसूस करेगा। यह इलाज काफी कारगर है।

बकरी का दूध और मेंहदी

बकरी का दूध मिरगी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। पाव भर बकरी के दूध में 50 ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर रोज सवेरे दो हफ्ता तक पीने से मिरगी के दौरे बंद हो जाते हैं।

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ब्राह्मी बूटी

ब्राह्मी के पत्ते हमारे घरों के आसपास खासकर जहां मिट्टी होते हैं, वहां उगते हैं। यह आकार में गोल और घुमावदार होता है। इसे रोज खाली पेट चबा कर खाने से न सिर्फ याददाश्त मजबूत होती है, बल्कि मिरगी के दौरे को भी यह कम करता है।

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