हार्ट ब्लॉकेज में मनुष्य की धड़कन सुचारू रूप से काम करना बंद कर देती हैं। इस दौरान धड़कन रूक रूक कर चलती है। कुछ लोगों मे यह समस्या जन्म के साथ से ही शुरू हो जाती है जबकि कुछ लोगों में बड़े होने पर समस्या विकसित होती है। जन्मजात ब्लॉकेज की समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉकेज  जबकि बाद में हुई समस्या को एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज  कहते हैं। आधुनिक रहन-सहन और खाने-पीने की आदतों के चलते अधिकांश लोगों में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या आम होती जा रही है। हार्ट ब्लॉकेज को जांचने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट किया जाता है।

open-uri20130427-32540-1h86tz0  जानिये हार्ट ब्लॉकेज के कारण के बारे में open uri20130427 32540 1h86tz0

हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण

  • बेहोश होना
  • सिरदर्द होना
  • जल्दी थक जाना
  • चक्कर आना
  • छाती में दर्द, सांस फूलना

ब्लॉकेज के कारण

हार्ट में ब्लॉकेज या रूकावट प्लॉक के कारण होती है। प्लॉक्स, कोलेस्ट्रॉल, फैट, फाइबर टिश्यू और श्वेत रक्त कणिकाओं का मिश्रण होता है, जो धीरे धीरे नसों की दीवारों पर चिपक जाता है। प्लॉक का जमाव गाढ़ेपन और उसके तोड़े जाने की प्रवृत्ति को लेकर अलग-अलग तरह के होते हैं। अगर यह गाढ़ापन हार्ड होगा, तो ऐसे प्लॉक को स्टेबल कहा जाता है और यदि यह मुलायम होगा तो इसे तोड़े जाने के अनुकूल माना जाता है, और इसे अनस्टेबल प्लॉक कहा जाता है।

स्टेबल प्लॉक

स्टेबल प्लॉक से रूकावट की मात्रा से कोई फर्क नहीं पड़ता, न ही इससे गंभीर हार्ट अटैक होता है। इस तरह का प्लॉक धीरे धीरे बढ़ता है, ऐसे में रक्त प्रवाह को नई आर्टरीज  का रास्ता ढूंढने का मौका मिल जाता है, जिसे कोलेटरल वेसेल कहते हैं। ये वेसेल ब्लॉक हो चुकी आर्टरी को बाईपास कर देती हैं और दिल की मांसपेशियों तक आवश्यक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाती हैं।

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अनस्टेबल प्लॉक

अस्थाई प्लॉक में, प्लॉक के टूटने पर, एक खतरनाक थक्का बन जाता है, और कोलेटरल को विकसित होने का पूरा समय नहीं मिल पाता है। व्यक्ति की मांसपेशियां  गंभीर रूप से डैमेज हो जाती हैं और वह कई बार सडन कार्डिएक डेथ का शिकार हो जाता है।

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