घेंघा यानि गोइटर  रोग थॉयराइड ग्लैंड के असामान्य तरीके से बढ़ने के कारण होता है। घेंघा रोग अस्थाई भी हो सकता है जो कि समय के साथ खुद ही ठीक हो जाता है लेकिन कुछ कारणों में यह गंभीर होता है जिसे चिकित्सकीय सलाह की जरूरत होती है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

क्यों होता है घेंघा

घेंघा  अधिकतर आयोडीन की कमी से होता है। इस रोग में गर्दन या ठोड़ी में छोटी या बड़ी सूजन आ जाती है, जिससे गले वाला हिस्सा कुछ फूला हुआ नजर आता है। अगर इसकी अनदेखी की जाए तो यह कैंसर का भी रूप धारण कर लेता है।

घेंघा के लक्षण

  • वातज घेंघा होने पर गला और तालु सूखा रहता है
  • मेदज घेंघा होने पर रोगी का मुंह तेल की तरह चिकना होता है तथा उसके गले से हर समय घुर्र-घुर्र जैसी आवाज निकलती रहती है।
  • कफज घेंघा होने पर भारी, थोड़े दर्द वाला, छूने में ठंडा, आकार में बड़ा तथा ज्यादा खुजली वाला होता है।
  • वातज घेंघा होने पर गर्दन में सूजन और सुई के चुभने जैसा दर्द
  • कफज घेंघा होने पर जहां पैदा होता है उस स्थान की खाल के रंग जैसा ही होता है।
  • मेदज घेंघा होने पर खुजली वाला, बदबूदार, पीले रंग की, छूने में मुलायम तथा बिना दर्द का होता है।

घेंघा बहुत अधिक हाइपरथाइरॉडिज्म  हार्मोन के स्त्रावित होने या हाइपोथाइरोडिज्म के बहुत कम स्त्रावित होने या एकदम सामान्य होने पर भी हो सकता है। घेंघा रोग होने का मतलब है कि थॉयराइड ग्लैंड एब्नॉर्मल तरीके से बढ़ रही है। घेंघा रोग के विषय में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी निम्न है:

घेंघा के विषय में जानकारी

  • घेंघा रोग में पुराना लाल चावल खाने से, पुराना घी, मूंग, परवल, करेला, तथा पुष्टिकारक (शक्ति देने वाला) और जल्दी पचने वाला भोजन करने से लाभ मिलता है। साथ ही आयोडिन की सही मात्रा भी खाने में लेना आवश्यक है।
  • घेंघा रोग में दूध से बने हुई पदार्थ, ईख के पदार्थ, खट्टी-मीठी चीजें, भारी तथा देर में पचने वाली चीजें, ज्यादा मीठी खाने वाली चीजें, मोटापा बढ़ाने वाला भोजन और ज्यादा रस वाले पदार्थ हानिकारक हैं। ऐसी चीजें घेंघा को बढ़ाने का काम करती हैं।
  • खाने में आयोडीन की कमी से भी घेंघा रोग होता है।

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