सामान्य उपचार

रेबीज से बचाव के लिए जरूरी है इसके बारें में जानकारी होना। रेबीज़ अकसर पशुओं के काटने के कारण होता है, साथ ही ऐसे में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह सिर्फ काटने ही नहीं छिलने के कारण भी होता है। रेबीज़ होने पर निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

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रेबीज का इलाज​

  • पशुओं के काटने पर काटे गए स्थान को पानी व साबुन से अच्छी तरह धो देना चाहिए।
  • धोने के बाद काटे गए स्थान पर अच्छी तरह से टिंचर या पोवोडीन आयोडिन लगाना चाहिए। ऐसा करने से कुत्ते या अन्य पशुओं की लार में पाए जाने वाले कीटाणु सिरोटाइपवन लायसा वायरस की ग्यालकोप्रोटिन की परतें घुल जाती हैं। इससे रोग की मार एक बड़े हद तक कम हो जाती है, जो रोगी के बचाव में सहायक होती है।
  • इसके तुरंत बाद रोगी को टिटेनस का इंजेक्शन लगवाकर चिकित्सालय में ले जाना चाहिए। यहाँ चिकित्सक की सलाह से काटे गए स्थान पर कार्बोलिक एसिड लगाया जाता है, जिससे अधिकतम कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
  • इसके बाद चिकित्सक की सलाह पर आवश्यकतानुसार इंजेक्शन लगाए जाते हैं, जो तीन या दस दिन की अवधि के होते हैं।
  • तत्पश्चात आवश्यकतानुसार निश्चित दिनों पर बुस्टर डोज भी दिए जाने का प्रावधान है, जो चिकित्सक के विवेक व काटे गए पशु की जीवित या मृत होने की अवस्था पर निर्भर करते हैं।
  • इंजेक्शन लगाने की क्रमबद्धता में लापरवाही घातक सिद्ध हो सकती है।
  • इस रोग का प्रकोप पशु के काटने के तीन दिन के बाद व तीन वर्ष के भीतर कभी भी हो सकता है।

जानवर के काटने पर करें यह घरेलू उपचार

रैबीज वायरस से फैलने वाली बीमारी है जो कि मनुष्य के दिमाग और स्पाइनल कोर्ड को प्रभावित करती है। यदि रैबीज के लक्षण उभरने से पहले इसका इलाज न किया जाए तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। ऐसे जानवर जो इस वायरस से अफेक्टेड  होते हैं, उनके सलाइवा  या दिमागी ऊतकों से यह वायरस दूसरे लोगों में फैल जाता है। यह बीमारी मनुष्यों के साथ ही अन्य अन्य स्तनधारियों में भी हो सकती है।

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जानवरों के काटने, चाटने, खरोंच लगाने या किसी जख्म को चाटने से भी रैबीज फैल सकती है। ऐसे में किसी भी जानवर के संपर्क में आने से पहले सावधान रहना चाहिए तथा सभी पालतू जानवरों को जरूरी टीके अवश्य लगवाने चाहिए। आइए आपको बताते हैं ऐसे उपाय, जिन्हें अपनाकर रैबीज से बचा जा सकता है।

विटामिन बी

रैबीज के इंफेक्शन से बचने को विटामिन बी भी बहुत लाभकारी है। रैबीज के उपचार के लिए अपने आहार में ऐसे भोजन को शामिल करें जिसमें विटामिन बी प्रचुर मात्रा में हो। ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए आप बंदगोभी , टमाटर, रस्पबैरी, तरबूज, अनानास और पालक आदि ले सकते हैं। इसके अलावा विटामिन बी के सप्लीमेंट लेना भी फायदेमंद होता है।

अखरोट

अखरोट में कुत्ते द्वारा होने वाली रैबीज के जहर को मारने की क्षमता होती है। उपचार के लिए अखरोट, प्याज और नमक की बराबर मात्रा लेकर पीस लें। इस मित्रण में थोडा़ शहद मिलाएं। प्रभावित हिस्से या घाव पर यह लेप लगाएं।

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विटामिन सी

यदि आप रैबीज से इंफेक्टेड हैं तो अपने आहार में विटामिन सी की मात्रा बढ़ाएं। इसके लिए अमरूद, लाल मिर्च , कीवी , फूल गोभी , संतरा और नींबू आदि लें। विटामिन सी सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

पानी और साबुन

यदि किसी जानवर के संपर्क में आने पर आपको लगता है कि रैबीज इंफेक्टेड था, तो सबसे पहले प्रभावित हिस्से को पानी और फिर साबुन से अच्छी तरह धोएं। यदि जानवर ने काटा हो या आपके जख्म पर खरोंचा हो तो बिल्कुल भी लापरवाही न करें। साबुन और पानी से धोने के बाद तुरंत चिकित्सक से मिलें।

लहसुन

लहसुन में प्राकृतिक तौर पर एंटीबायेटिक गुण होते हैं। रैबीज के घाव को जल्दी भरने के लिए दिन में तीन बार लहसुन की कली चबाएं।

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लेवेंडर

जानवर के काटने के स्थान पर या रैबीज प्रभावित हिस्से पर लेवेंडर को पीस कर लेप लगाने से भी इंफेक्शन से बचा जा सकता है।

जीरा

कुत्ते के काटने से फैलने वाली रैबीज पर जीरा भी काफी असर दिखाता है। दो बड़े चम्मच जीरा को पीसकर उसमें बीस काली मिर्च पीसकर मिलाएं। दोनों पाउडर में पानी मिलाकर लेप बनाएं और प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इससे भी घाव जल्दी भरने में मदद मिलेगी।

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नोट

यह सभी उपचार घरेलू हैं। इनमें से कुछ उपचार जानवर के काटने के तुरंत बाद डॉक्टर के पास पहुंचने की देरी की अवस्था में पहले किए जा सकते हैं, ताकि इंफेक्शन ज्यादा न बढ़े या अवस्था घातक न हो। साथ ही कुछ उपचार इलाज के दौरान लगातार किए जा सकते हैं। लेकिन रैबीज होने की स्थिति में चिकित्सक के पास जाना जरूरी है, घरेलू उपचार अतिरिक्त लाभ के लिए हैं।

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