लिवर कैंसर की पहचान आमतौर शुरुआती अवस्था में कम हो पाती है। जब रोगी में लिवर कैंसर बढने लगता है तभी इसके लक्षण महसूस किए जाते हैं। लिवर कैंसर, लिवर मेंहोने वाला घातक ट्यूमर है। यह आमतौर पर एक और कैंसर से मेटास्टेसिस के रूप में प्रकट होता है। भूख न लगना, कमजोरी, सूजन, पीलिया और ऊपरी पेट की परेशानी इसके मुख्य लक्षणों में से एक है।

ब्लड टेस्ट 

अल्फॉ -फेटोप्रोटीन नामक एक प्रोटीन के बढ़े हुए स्तर की जाँच, जो आपमें लिवर कैंसर का संकेत दे सकता है।

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अल्ट्रा साउंड

इसका उपयोग लिवर कैंसर की खोज और कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंथट) तथा कैंसररहित (सामान्ये) ट्यूमरों में अंतर के लिए किया जाता है।

मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)

एक तकनीक जिसमें शरीर के अंदर की बनावट जानने के लिए चुम्बकीय क्षेत्र का प्रयोग होता है। इसमें कम्यूटर टोमोग्राफी या अल्ट्रा साउंड की अपेक्षा अधिक सटीक छवियां निर्मित होती हैं आमतौर से इसकी जरूरत नहीं पड़ती।

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लैपेरोस्कोपी

लिवर देखने के लिए इसमें पेट में छोटा चीरा लगाकर एक पतली, हल्कीप लाईटेड ट्यूब अंदर डाली जाती है।

शारीरिक जांच

शारीरिक जांच जैसे वजन में कमी होने, कुपोषण, कमजोरी, लिवर का बढ़ना और इससे जुड़ी बीमारियां जैसे कि हेपैटाईटिस और सिरोसिस।

सीटी स्कैन

एक प्रक्रिया ट्यूमर की खोज और लोकेशन जानने के लिए जिसमें एक्सक-रे और कम्पयूटर तकनीक का प्रयोग शरीर की अनुप्रस्थ (क्रॉस सेक्शूनल) छवियां निर्मित करने के लिए किया जाता है।

हेपैटिक आर्टिरी एंजियोग्राम

एक टेस्ट जिसमें एक्स-रे व डाई के जरिए रक्त वाहिनियों में इंजेक्ट की गई । ऐसी रक्त वाहिनियों की जांच की जाती है जो लिवर कैंसर को रक्त पहुंचाती हैं और यह पता लगाया जाता है कि ट्यूमर को सर्जिकल तरीके से हटाया जा सकता है या नहीं।

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