स्लिप डिस्क या कमर दर्द  कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक तरह से शरीर की यांत्रिक असफलता  है। कमर दर्द के सबसे महत्वपूर्ण  कारण रीढ़ से या मेरुदंड  से जुड़े होते हैं। स्पाइनल कॉर्ड या रीढ़ की हड्डी स्पाइन वर्टिब्रा  से मिलकर बनती है जिस पर शरीर का पूरा वजन टिका होता है। यह सिर के निचले हिस्से से शुरू होकर टेल बोन  तक होती है। हमारी रीढ़ की हड्डी में हर दो वर्टिब्रा  के बीच में एक डिस्क होती है जो झटका सहने का यानि शाक एब्जार्वर का काम करती है। आगे-पीछे, दायें-बायें घूमने से डिस्क का फैलाव होता है। गलत तरीके से काम करने, पढ़ने, उठने-बैठने या झुकने से डिस्क पर लगातार जोर पड़ता है। इससे मेरुदंड की नसों  पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है। इस डिस्क के घिस जाने से इसमें सूजन आ जाती है, और यह उभरकर बाहर निकल आती है। इसके बाद यह रीढ़ की हड्डी से पैरों तक जाने वाली नसों पर दबाव डालती है। नसें दबने के कारण यह दर्द पैरों तक भी जा सकता है। इसमें पैर सुन्न हो जाने का खतरा रहता है। दर्द इतना कष्टदायक होता है कि मरीज अपने दैनिक कार्य करने तक में असमर्थ हो जाता है। कमर दर्द  अब लोगों के लिए एक कष्टदायक समस्या बनी हुई है। आज हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं और दुनिया भर में इसके सरल व सहज इलाज की खोज जारी है। दिनभर बैठे कर काम करने से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। कमर दर्द अगर नीचे की तरफ बढ़ने लगे और तेज हो जाए, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। कभी-कभी दर्द कुछ मिनट ही होता है और कभी-कभी यह घंटों तक रहता है। 30 से 50 वर्ष की आयुवर्ग के लोग इसकी चपेट में अधिक आते हैं। वे महिला और पुरुष इसके अधिक शिकार होते हैं, जिन्हें अपने काम की वजह से बार-बार उठना, बैठना, झुकना या सामान उतारना, रखना होता है।

back pain

कमर दर्द के लक्षण

  • स्पाइनल कॉर्ड के बीच में दबाव पडने से कई बार हिप या थाईज के आसपास सुन्न महसूस करना,
  • समस्या बढने पर पेशाब और मल त्यागने में परेशानी,
  • चलने-फिरने, झुकने या सामान्य काम करने में भी दर्द का अनुभव होना, झुकने या खांसने पर शरीर में करंट सा अनुभव होना।
  • नसों पर दबाव के कारण कमर दर्द, पैरों में दर्द या पैरों, एडी या पैर की अंगुलियों का सुन्न होना,
  • पैर के अंगूठे या पंजे में कमजोरी,
  • रीढ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द,

स्लिप डिस्क या कमर दर्द  होने के कुछ प्रमुख कारण

  • उम्र बढने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है,
  • पैरों में कोई जन्मजात खराबी या बाद में कोई विकार पैदा होना।
  • लेटकर या झुककर पढ़ना या काम करना,
  • कमर की हड्डियों या रीढ़ की हड्डी में जन्मजात विकृति या संक्रमण,
  • कंप्यूटर के आगे बैठे रहना,
  • अनियमित दिनचर्या,
  • अचानक झुकना,
  • देर तक ड्राइविंग करना,
  • वजन उठाना,
  • दुर्घटना में चोट लगना,
  • सुस्त जीवनशैली,
  • झटका लगना,
  • फिसलना,
  • गलत पोश्चर ,
  • गलत तरीके से उठना-बैठना,
  • गिरना,
  • शारीरिक गतिविधियां कम होना,
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