गर्मियों की शुरुआत के साथ ही शरीर के लिए ऐसे पेय पदार्थों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जो शरीर को गर्मी से राहत देते हुए ठंडक प्रदान करें | उनमें से बेल भी एक है, जो पेट के लिए सबसे अच्छा माना गया है| ऊपर से भूरे सुनहरे रंग वाले पके बेल फल का गूदा पीला और खुशबूदार होता है | ठंडी तासीर होने की वजह से इसे शीतल फल भी कहा जाता है| उष्ण कटिबंधीय फल बेल के वृक्ष हिमालय की तराई, मध्य एवं दक्षिण भारत बिहार, तथा बंगाल में घने जंगलों में अधिकता से पाए जाते हैं |चूर्ण आदि औषधीय प्रयोग में बेल का कच्चा फल, मुरब्बे के लिए अधपका फल और शर्बत के लिए पका फल प्रयोग में लाया जाता है |

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बेल के फलों में बिल्वीन नामक तत्व एक प्रधान सक्रिय घटक होता है | इसके अतिरिक्त गूदे में लबाब, पेक्टिन, शर्करा, कषायिन जैसे तत्व व तेल पाए जाते हैं| ताजे पत्तों से प्राप्त पीताभ-हरे रंग का तेल स्वाद में तीखा और सुगन्धित होता है | इसका कच्चा फल पाचक, पक्का फल कषाण, मधुर और पत्तों का रस घाव ठीक करने, मानसिक वेदना दूर करने, ज्वर नष्ट करने, जुकाम और श्वास रोग मिटाने तथा मूत्र में शर्करा कम करने ज्वर,गर्भाशय का घाव, नाडी अनियमितता, हृदयरोग आदि दूर करने में सहायक होती है |

न्यूट्रिशनल वैल्यू

बेल में प्रोटीन, फॉस्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम, फैट, फाइबर,विटामिन-सी, बी पाया जाता है | आयुर्वेद में इसके रस को खाली पेट पीने की सलाह दी गई है | यह ज्यादा फायदेमंद होता है |

पेट के लिए रामबाण है बेल

दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करने के साथ पेट के रोगों में भी बेल को रामबाण माना गया है | यह एसिडिटी दूर करता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है | अल्सर और कब्ज के साथ पेचिश की समस्या में यह फायदेमंद है | पेट संबंधी समस्या के लिए इसके मुरब्बे का सेवन करें |

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लू से बचाता है

गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर पैर के तलवे पर लगाने से आराम मिलता है | लू लगने पर इसके रस को मिश्री के साथ पीना भी सही रहता है| दस्त हो रहा हो, तो इसके कच्चे फल के गूदे का चूर्ण बनाकर काले तिल के चूर्ण के साथ खाएं |

पीलिया में बेल की कोंपलों का पचास ग्राम रस, एक ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर सुबह-शाम पिलाएं | शरीर में सूजन भी हो तो इसे तेल की तरह मलिए| सौ ग्राम पानी में थोड़ा गूदा उबाल कर, ठंडा होने पर कुल्ले करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं |

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