पेट गैस (सूजन), आमतौर पर ‘मैत्रीक’ बैक्टीरिया द्वारा बड़ी आंत में बिना पचे भोजन के किण्वन के कारण होती है। किण्वन से गैस पैदा होती है, जिससे आंते सूज जाती है और परेशानी का कारण बन जाती है। भोजन के घटक,जो सामान्यत: मानव पाचन प्रणाली में होते है, उसे पचाने में परेशानी होने लगती है, जिनमें अघुलनशील फाइबर सयन्त्र, फ्रक्टोज की अत्यधिक मात्रा, दूध में मौजूद चीनी(लेक्टोस) और ग्लूटन प्रोटीन शामिल है। गैस पास करने, आहार में बदलाव और कुछ दवाओं के खाने से सूजन से होने वाले दर्द में राहत मिल सकती हैं।

गैस छोड़ने से घबराएँ नहीं: शायद यह गैस से होने वाले पेट दर्द से छुटकारा पाने का सबसे आसान तरीका (फ्लेटूलेटिंग या फार्टिंग/flatulating or farting) है। अधिकांश लोग और संस्कृतियां खुले में गैस छोड़ने को बुरी बात मानते हैं, इसलिए समझदारी यही है कि बाथरूम में जाकर गैस छोड़ें। गैस निकलने को सुविधाजनक बनाने के लिए, आराम से टहलें या हल्के से पेट की मसाज बाहर की ओर करें, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी आंत से गैस बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और सल्फर तत्वों के मिलने से, बड़ी आंत में बैक्टीरिया के किण्वन के कारण गैस पैदा होती है—जिससे बदबू पैदा होती है।
उम्र बढ्ने के साथ अक्सर पेट फूल जाना, पाचन एंजाइम्स में कमी होना सामान्य सी बात है।

डकार के द्वारा दर्द कम करने का प्रयास करें: गैस पास करने के अन्य विपरीत तरीके पादना और डकारना है. हालाँकि डकार लेने से निचले पेट की गैस पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन यह पेट और उपरी आंत की फालतू गैस से मुक्ति देता है। तरल पदार्थ तेजी से पीने से या जल्दी खाना खाने से, स्ट्रॉ से पेय पदार्थ पीने से, च्युइंग गम और धूम्रपान से गैस बन सकती हैं। डकार के द्वारा जमा गैस को सरलता से, जल्दी से और बिना दर्द के बाहर निकला जा सकता है।[३] अधिक मात्र में कार्बन डाय ऑक्साइड युक्त पेय पीने से पेट फूल सकता है, लेकिन कुछ घूँट पीना डकार लाने में और गैस स्व मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
प्राकृतिक उपचार के तौर पर कभी कभी अदरक, पपीता, नीम्बू पानी और पिपरमेंट का प्रयोग डकार लेने में सहायक होता है।
कुछ लोगो और संस्कृतियो में (परन्तु सभी नहीं) सार्वजानिक रूप से जोर से डकार लेने को पादने के सामान बुरी आदत माना जाता है, अतः ऐसा ध्यान से करें।

गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से बचें: कुछ खाद्य पदार्थ में गैस बनाने की प्रकृति अधिक होती है क्योंकि उन्हें पचाना मुश्किल होता है या उनमें पेट या आंतों को परेशान करने वाले पदार्थ होते हैं। पेट-फूलने या गैस उत्पन्न करने वाले कुछ खाद्य पदार्थों में सेम, मटर, मसूर, गोभी, प्याज, ब्रॉक्ली, फूलगोभी, आलूबुखारा और मशरूम शामिल हैं।[४] बहुत ज्यादा अघुलनशील फाइबर (ज्यादातर सब्जियों और फलों के छिलकों में पाया जाता है), फ्रक्टोज शुगर (सभी फलों, खासकर बेर में पाए जाता है) और ग्लूटेन (ज्यादातर अनाज जैसे गेंहू, ज्वार, और राई में पाया जाता है) का अत्यधिक सेवन भी पेट फूलने और दस्त का कारण बन सकता है। यदि आप कच्ची सब्जिया और फल खाना पसंद करते हैं तो उनके छोटे छोटे टुकड़े खाएं, धीरे-धीरे चबाएं और पाचन के लिए अधिक समय दें।
सेलियक रोग से पीड़ित लोग विशेष रूप से ग्लूटन के प्रति संवेशनशील होते हैं। जिससे उनकी आंत में परेशानी व पेट दर्द और सूजन बढ़ जाती है।
लोगों में सूजन के प्रति संवेदनशील होने का यह कारण हैं कि अन्य पेट के रोग, जिनमे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस/IBS), अल्स्रेटिव क्लोटिस (Ulcerative clotis) और क्रोहन (crohan’s) शामिल हैं।
पेय पदार्थ जिनसे सूजन बढ़ जाती है, जैसे कॉफी, फ्रक्टोज़-युक्त पेय पदार्थ, बीयर और कृत्रिम शर्करा (एस्पर्टम या सोर्बिटोल/aspartame or sorbitol) के साथ कार्बन डाय ऑक्साइड युक्त सोडा है।

कब्ज के लिए घुट्टी का इस्तेमाल करें: कब्ज पेट में हो रही गड़बड़ या मल के निकलने में आ रही मुश्किल हो सकती हैं, जो बहुत अधिक रेशेयुक्त खाने (या बिलकुल भी रेशे युक्त चीजे न खाने) या पर्याप्त मात्र में पानी ना पीने से हो सकती हैं। स्थायी कब्ज का मतलब है कई महीनो या हफ़्तों से एक हफ्ते में तीन बार से कम शौच जाना, लेकिन कब्ज के अधिकांश मामलों में ऐसा सिर्फ कुछ ही दिनों के लिए होता हैं। कब्ज से आंतों में दर्द और ऐंठ हो सकती हैं जो गैस के दर्द की तरह हो सकती हैं, लेकिन परेशानी के यह कारण अक्सर बहुत अलग होते है। कब्ज के लिए औषधीय उपचारों में घुट्टी का सेवन भी शामिल हैं, जो पेट की गतिविधियों को सुचारू करने में मदद करता हैं । घुट्टी आपके मल को एकत्रित करती हैं, फाइबर कॉन (FiberCon), मेटाम्युसिल (Metamucil), मल को नरम करती हैं, जिससे तरल पदार्थ को आपके मलाशय से गुजरने में मदद मिलती हैं या आपके मलाशय को (खनिज तेल या मछली के तेल की मदद से) चिकना करती हैं।[१५]
कम भोजन करने वाले बुजुर्ग लोगों को सामान्य रूप से रेशे युक्त चीजे न खाने के कारण आमतौर पर कब्ज की शिकायत रहती हैं, इसीलिए उन्हें आलूबुखारा खाने या उसका रस पीने की हिदायत दी जाती है|
बच्चों और युवाओं में कब्ज अधिकतर एक बार में बहुत अधिक फाइबर खाने की वजह से होता हैं जैसे गाजरों और सेबों का सेवन इत्यादि।
यदि कब्ज बहुत अधिक रेशेयुक्त पदार्थ के सेवन से हुई हैं, तो गैस बनना या सूजन आना भी संभव हैं | इस स्थिति में गैस के दर्द से छुटकारा पाने के लिए, ऊपर दिए गए सुझाव काम करेंगे।

सलाह

  • किसी भी प्रकार के खाने को, बहुत जल्दी बहुत ज्यादा खाने से सूजन या पेट में दर्द हो सकता हैं, इसीलिए छोटे छोटे हिस्सों में भोजन लें, छोटे निवाले खाएं और आराम-आराम से चबाएं।
  • च्युइंग गम या सख्त कैंडी चूसने से बचे क्यूंकि आप को सामान्य रूप से अधिक हवा निगलनी पड़ेगी।
  • अपने जबड़ो की नियमित रूप से जांच कराएँ, क्यूंकि अगर वो सही तरह से फिट नहीं हैं तो आप खाते या पीते समय अधिक हवा निगल लेंगे।

Leave a Reply