आयुर्वेद चिकित्सा में बालों के सफेद हल्का पीला होने की विकृति को पलित रोग कहा जाता है। आयुर्वेदाचार्य वाग्भट के अनुसार पलित केश रोग है। वात-पित्त दोषों की विकृति के कारण पलित रोग की उत्पत्ति होती है। आधुनिक परिवेश में 30 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते स्त्री पुरुषों को पलित रोग पीड़ित करने लगता है। पलित रोग में बाल तीव्र गति से सफेद व कुछ पीले-पीले होने लगते हैं। अल्प आयु में बालों के सफेद होने से बालों का सौंदर्य आकर्षण नष्ट हो जाता है। | पलित रोग को अनेक नामों से संबोधित किया जाता है। पालित्य, कपिकेश, पम्बकेश, श्वेत केश आदि पलित रोग के नाम हैं।

बाल सफेद होने के कारण

1)   आयुर्वेद चिकित्सा में आयुर्वेदाचार्यों ने दूषित, बासी, उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने प्रकृति -विरुद्ध खाद्य पदार्थों वाले आहार को पलित रोग की उत्पत्ति का प्रमुख कारण बताया है। अधिक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय (खट्टे) रसों से निर्मित भोजन शरीर में पहुंचकर वात-पित्त को अधिक विकृत करता है।

2)   महर्षि सुश्रुत ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ सुश्रुत संहिता में पलित रोग के संबंध में लिखा है, ‘क्रोध शोक श्रम कृतः शरीरोष्मा शिरोगतः । पित्तं च केशान् पचति पलितं तेन जायते। (सु. नि. 13/37) क्रोध, शोक और श्रम करने से पलित रोग की उत्पत्ति होती है। क्रोध, शोक और श्रम की अधिकता के कारण शरीर की उष्मा और पित्त सिर में पहुंचकर, अपने प्रभाव से समय से पहले बालों को पकाकर सफेद कर देते हैं।

3)   महर्षि चरक ने वात, पित्त के साथ कफ दोष को भी पलित रोग में बहुत हानिकारक वर्णन किया है। क्रोध करने से पित्त की विकृति होती है। शोक (गहरी चिंता व दु:ख) वात को कुपित करते हैं। वायु के प्रभाव से ऊष्मा और पित्त जब सिर में पहुंच जाते हैं तो बालों में पलित रोग की उत्पत्ति करते हैं। महर्षि चरक के
अनुसार वात आदि दोषों की विकृति बालों को नष्ट करके स्त्री-पुरुष को केश विहीन अर्थात् गंजा भी बना सकती है। इंद्रलुप्त अर्थात् गंजेपन की विकृति स्त्रियों में बहुत कम होती है जबकि पुरुष बहुत अधिक संख्या में गंजे होते हैं।

4)   आधुनिक परिवेश में अधिक दौड़-धूप, शारीरिक श्रम और मानसिक तनाव के कारण 35 वर्ष की आयु में पहुंचने तक बाल तेजी से सफेद होने लगते हैं।

5)   कृत्रिम रसायनों से निर्मित क्रीम व तेलों से बालों को अधिक हानि होती है। बाल अधिक तेजी से सफेद होते जाते हैं।

6)   आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में मैलानिन की उपस्थिति बालों को काला बनाए रखते हैं। त्वचा और भौहों को मैलानिन ही रंग देता है। जब शरीर में मैलानिन की कमी होती है तो बाल सफेद होने लगते हैं। विभिन्न संक्रामक रोग, पाचन क्रिया की विकृति के कारण जब शरीर में मैलानिन की कमी होने लगती है तो तेजी से बाल सफेद होने लगते हैं।

7)   जीर्ण प्रतिश्याय (जुकाम) और आंत्रिक ज्वर के कारण बालों के सफेद होने की विकृति अधिक होती है।

8)   अधिक सहवास के कारण शुक्र (वीर्य) की अत्यधिक कमी होने से बाल पलित रोग के शिकार होते हैं।

9)   आहार में विटामिन की कमी से शरीर में केश रंजक द्रव्य (मैलानिन) की उत्पत्ति बहुत कम हो जाने से बाल पकने लगते हैं।

10)   भोजन में अम्ल, लवण और क्षार द्रव्यों की अधिकता से पलित रोग की उत्पत्ति होती है।
आइये जाने बालों को सफेद होने से रोकने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए तथा खान-पान संबंधी जरुरी नियम |

11)   पित्त के प्रभाव से बालों को बहुत हानि होती है। इसलिए उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से निर्मित चटपटे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
12)   छोले-भठूरे, चाट-पकौड़ी, आलू की टिकिया, समोसे, कचौड़ी, चाऊमीन आदि भी शरीर में पहुंचकर वात-पित्त की अधिक उत्पत्ति करते हैं। इन खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करके अपने बालों के पलित रोग से सुरक्षित रख सकते हैं।

सफेद बालों का घरेलु उपचार

1)   रीठा को जल में 12 घंटे तक भिगोकर उसके फेन से सिर के समस्त बालों को धोकर सूखे तौलिया से सुखायें । तदुपरान्त सूखे आँवला 250 ग्राम को 12 घंटे तक जल में भिगोकर इसके निथरे हुए जल को छानकर इससे केशों की जड़ों को भिगोते हुए धोवें । यह क्रिया (प्रयोग) प्रतिदिन 1-2 बार किया करें। अत्यन्त लाभप्रद घरेलु योग है।

2)   अच्युताय हरिओम फार्मा का “केश पोषक” बालों को धो पोंछ व सुखाकर बालों की जड़ों में प्रतिदिन 1-2 बार लगाना अतिशय गुणकारी है।

3)   आंवले के पाउडर में नीबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं। आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों की कंडीशनिंग होती है, और बाल भी काले होते है। आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहें।

4)   जाड़े में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है।

5)   आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नीबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे।

6)   एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए। फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य करें।

7)   नहाने से आधा घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं, बाल काले होने लगेंगे।

8)   सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और बाल काले भी होने लगेंगे।

9)   भृंगराज और अश्वगंधा की जड़े बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छी तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है।

10)   नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं। प्रतिदिन शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है।

11)   अदरक को कद्दूकस करके शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफेद होना कम हो जाएगा।

12) दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा सा नीबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

13)   आधा कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिलाकर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले रहेंगे।

14)   शैंपू और साबुन से बाल धोना बिलकुल बंद कर दें। सप्ताह में कम से कम दो बार मुलतानी मिट्टी का लेप किया करें। इससे बालों की समस्या से निजात मिलती है।

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