पीलिया रोग पाचनशक्ति की कमजोरी (Weak immune system) व लिवर की कमजोरी (liver weakness) के वजह से होता हैं. पीलिया रोग में रोगी के शरीर का सारा खून पीला पढ़ जाता हैं, इस वजह से रोगी को खून की कमी होने लगती हैं. और अगर इस स्थिति में समय पर उपचार नहीं करवाया जाये तो रोगी को अत्यधिक गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता हैं

पीलिया में शरीर पीला क्यों हो जाता है

पीलिया में नाख़ून, आंखें शरीर आदि पिले हो जाते हैं, क्योंकि शरीर के अंदर का सारा खून पीला हो जाता हैं. खून पर यह पीलापन बिलीरुबिन नामक एक पदार्थ के वजह से होता हैं. यह बिलीरुबिन नामक पदार्थ ही पीलिया रोग को जन्म देता हैं. जब शरीर में इस पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती हैं तो शरीर का सारा खून पीला हो जाता हैं और इस पीलेपन को हम पीलिया रोग, पीलिया की बीमारी कहते है

लिवर की कमजोरी है वजह

  • हमारे शरीर के व्यर्थ के पदार्थों को फ़िल्टर कर के शरीर से बाहर निकालने का कार्य हमारा लिवर करता हैं. बिलीरुबिन जैसे पदार्थ भी लिवर में ही एक तरफ अटके रहते हैं. लेकिन जब हमारे लिवर में बिलीरुबिन की मात्रा 2.5 से ज्यादा हो जाती हैं तो लिवर गंदगी को फ़िल्टर करने की प्रक्रिया को रोक देता हैं.
  • ऐसे में लिवर कमजोर हो जाता हैं और इस लिवर की इस कमजोरी के वजह से बिलीरुबिन नामक पदार्थ लिवर में से निकलकर शरीर में फेल जाता हैं, और जब बिलीरुबिन लिवर से बाहर निकल जाता हैं तो यह रेड ब्लड सेल्स को ख़त्म करने लग जाता हैं, (या यूं कहे की जब लिवर की कमजोरी के वजह से रेड ब्लड सेल्स वक्त से पहले ही खत्म हो जाते हैं तो इन पर बिलीरुबिन नामक पदार्थ कब्ज़ा कर लेता हैं, और यह लाल खून पिले खून में बदल जाता हैं).
  • होता यह हैं की जैसे ही बिलीरुबिन पदार्थ लिवर से बाहर निकलता हैं तो यह रेड ब्लड सेल्स को खत्म करने लगता हैं और पुरे शरीर में अपनी मात्रा को बढ़ा देता हैं, इससे शरीर का सारा खून पीला पढ़ जाता हैं इस प्रॉसेस को ही पीलिया रोग कहते हैं. इससे पहले की बिलीरुबिन शरीर के सारे खून में मिल जाए रोगी को ट्रीटमेंट कर लेना चाहिए ऐसे कई रामबाण आयुर्वेदिक उपाय हैं जिनसे आप घर पर ही इस पीलिया का समाधान कर सकते हैं

पीलिया का आयुर्वेदिक उपचार

  1. पुराने से पुराने पीलिया में यह अनोखा व रामबाण उपाय बहुत असरकारी होता हैं, इसके मात्र 5-6 दिन के प्रयोग से ही पीलिया में आयुर्वेदिक उपचार हो जाता है. हम बात कर रहे हैं नारियल पानी की, नारियल पानी में ऐसे कई अनोखे गुण होते हैं, पीलिया इसका प्रयोग भी बहुत ही आसान हैं रोजाना दिन में नियमित रूप से 2 या 3 हरे नारियल का पानी पिए, इसके साथ ही पुरे दिन भर और कुछ न खाये सिर्फ नारियल पानी के ऊपर ही रहे. यह ऐसा प्रयोग हैं जो की सिर्फ 1-2 दिन में ही घरेलु इलाज कर देगा. अगर आप लगातार 5-6 दिनों तक सिर्फ नारियल पानी के सहारे नहीं रह सकते तो थोड़ा-थोड़ा हल्का भोजन भी इसके साथ खा सकते हैं ताकि आपको कोई कमजोरी महसूस न हो, लेकिन ध्यान रखे सिर्फ थोड़ा ही भोजन करे और भोजन हल्का होना चाहिए. यानी सात्विक आहार ग्रहण करे. तो पीलिया में तेजी से लाभ होता है
  2. पीलिया रोग में सीके हुए चना जिन्हें “भांगड़े” भी कहा जाता हैं, यह पीलिया के उपाय में सबसे ज्यादा प्रसिद्द हैं. इनका पुरे भारत देश में प्रयोग किया जाता हैं. आप इसका सेवन डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों के साथ भी कर सकते हैं, इसका सेवन करने में कोई परहेज नहीं करने पढ़ते हैं. चने खून को बढ़ाने में मदद करते जिससे शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ती हैं औऱ बिलीरुबिन नामक पदार्थ की संख्या घटती हैं. हमने आपको यहां पर पीलिया के जितने भी आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे बताये हैं उनमे से यह उपाय सबसे ज्यादा आसान हैं क्योंकि चने का सेवन आप दिन हो या रात कभी भी किसी भी समय कर सकते हैं इसमें किसी तरह के परहेज नहीं होते. इसलिए आप यहां दिए गए अन्य नुस्खे से उपचार के दौरान भी चने का सेवन करते रहे
  3. घरेलु नुस्खे में फिटकरी के बारे में आपने में भी सुना होगा, यह पीलिया के सबसे आसान और प्रसिद्ध आयुर्वेदिक नुस्खे में से एक हैं. फिटकरी का आयुर्वेदा में महत्वपूर्ण स्थान हैं, इसके सेवन की कई तरीके हैं, प्रत्येक विधि बीमारी का जड़ से छुटकारा करती हैं फिर चाहे वह पीलिया हो, मलेरिया हो, टाइफाइड हो आदि कोई सा भी रोग हो हर रोग में फिटकरी बहुत लाभकारी होती हैं इसके लिए आप गुलाबी रंग की फिटकरी या फिर साफ़ स्वच्छ सफ़ेद रंग की फिटकरी दोनों में से जो उपलब्ध हो जाये वह 50 ग्राम की मात्र में ले लें (फूली हुई फिटकरी का उपयोग करे). इसके बाद इसे अच्छे से बारीक़ पीस लें, बारीक़ पीस लेने के बाद 3-4 रत्ती की मात्र में शुद्ध ताज़ा गाय के दूध से बने दही या छाछ में मिलाकर सेवन करे (3-4 रत्ती से मतलब हैं, 3-4 चिमटी फिटकरी का पिसा हुआ चूर्ण).
    दिन में करीबन तीन बार इसका सेवन करे, कुछ ही दिनों में आपको महसूस होने लगेगा की पीलिया का असर धीरे-धीरे खत्म हो रहा हैं. यह फिटकरी भी आयुर्वेदिक इलाज हैं. इस प्रयोग को सभी तरह के पीलिया में इस्तेमाल किया जाता हैं, जब आपका पीलिया खत्म हो जाए तो इस प्रयोग को करना छोड़ दें, लेकिन शुरुआत में लगातार सात दिनों तक इसका (पीलिया) सेवन जरूर करे
  4. सबसे पहले आप बाजार से अच्छी बादाम, इलाइची और छुआरे खरीद लाये, पहले दिन के सेवन के लिए इस तरह करे प्रयोग – इनमे से 11 ग्राम बादाम, तीन छुआरे और 6 ग्राम इलाइची अलग निकाल लें व अब एक glass या बड़े कटोरे को पानी से पूरा भर लें, इसके बाद इसमें यह बादाम, इलाइची और छुआरे डाल दें (कटोरे में पानी भरपूर होना चाहिए ताकि यह सभी अच्छे से भीग जाए).
    अब इस कटोरे को ऊपर से ढंक दें ताकि इसमें कोई कचरा न गिरे, और रात भर के लिए इन सभी को कटोरे में भीगने के लिए छोड़ दें. अब सुबह होने पर आप इन सभी को कटोरे में से निकाल लें व अच्छे से बारीक पीस लें. अब इस नुस्खे को थोड़ा स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें थोड़ी सी पीसी हुई मिश्री मिला दें और साथ में स्वच्छ मक्खन भी मिला दें.
    इन सब को आपस में मिलाकर अच्छे से घोंट लें, घोंटने के बाद पीलिया के रोगी को इसका सेवन करा दें. पीलिया में इस प्रयोग को आप रोजाना सुबह व शाम दोनों समय करे. यानी सुबह के प्रयोग के लिए रात को सोते वक्त बादाम, इलाइची और छुआरे को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसका प्रयोग कर लें, और शाम के प्रयोग के लिए सुबह उठने के बाद वापस बादाम, इलाइची और छुआरे को कटोरे में ताज़ा डालकर भिगोकर रख दें और शाम को इसका प्रयोग कर लें. इस तरह रात का सुबह और सुबह का शाम को प्रयोग करते रहना हैं. पीलिया का यह प्रयोग आप शुरुआत में 10 दिनों तक लगातार करते रहे
  5. यह हम सब जानते हैं की पीलिया रोग में खून की कमी आने लगती हैं, और ऐसे वक्त में खून की कमी को पूरा न किया जाए तो रोगी की हालत ओर गंभीर होने की सम्भावना रहती हैं.
    ऐसे में खून बढ़ाने के लिए व खून की सभी तरह समस्या को दूर करने के लिए टमाटर से पीलिया में घरेलु इलाज का प्रयोग जरूर करे. (पीलिया में रेड ब्लड सेल्स मर जाते हैं, इनकी संख्या बहुत कम हो जाती हैं. ऐसे में टमाटर का सेवन रामबाण होता हैं, क्योंकि टमाटर रेड ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ाने में मदद करता हैं, यह उनको ऊर्जा प्रदान करता हैं
  6. आप चने की दाल का भी प्रयोग कर सकते हैं – रोजाना रात को चने की दाल को किसी कटोरे या बर्तन में डालकर उसे पानी से भर दें औऱ रात भर इस दाल को भीगने के लिए ऐसे ही छोड़ दें. फिर अगली सुबह चने की दाल को अलग निकाल लें औऱ पानी को बहा दें. इसके बाद चने की दाल में स्वच्छ गुड़ मिलाकर पीलिया के रोगी को सेवन कराये. इस तरह चने की दाल से रोजाना प्रयोग करने से जड़ से छुटकारा हो जाता हैं
  7. नींबू लिवर की प्रकिया को सुधारता हैं व लिवर को शरीर में मौजूद बेकार के पदार्थों को फ़िल्टर करने में मदद करता हैं. यह बिलीरुबिन नामक पदार्थ को भी शरीर से बाहर निकालने में मदद करता हैं. साथ ही जिन्हें पेट सम्बन्धी या पाचन से समबन्धित कोई रोग हो तो यह उनको भी ठीक कर देता हैं. एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द व पेट की सफाई इन सभी में यह बहुत अनोखा इलाज करता हैं
  8. सबसे पहले आप एक प्याज लीजिये अब इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बारीक काट लें इसके बाद काला या सेंधा नमक जो भी उपलब्ध हो औऱ थोड़ा नींबू का रस इसमें मिला दें. प्याज के टुकड़ों को औऱ नमक, नींबू के रस में अच्छे से घोटकर इसका रोजाना नियमित रूप से सुबह को औऱ शाम को सेवन करे. पीलिया के अलावा प्याज से और भी कई अन्य लाभ होते है
  9. रोजाना 50 ग्राम आंवले के रस को 1 चम्मच शहद में मिलाकर अच्छे से घोंटकर लेने से पीलिया को सिर्फ 15 से 20 दिन में ठीक कर देता हैं. आप बताये गए आयुर्वेदिक नुस्खों को बताई गई विधि के अनुसार करके देखें पीलिया से कुछ ही दिनों में यह आपको आराम पहुंचा देंगे. पीलिया ए, पीलिया बी, पीलिया सी सभी में लाभ होगा. इसके साथ ही पानी ज्यादा पीते रहे, ज्यादा घूमे फिरे नहीं, घर पर आराम करे. ऐसा करने से यह आयुर्वेदिक उपचार औऱ भी ज्यादा आसान हो जायेगा, इसलिए पीलिया में शरीर को पूर्ण आराम देना जरुरी हैं

 

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