इमली का खट्टा-मीठा स्वाद किसी के भी मुंह में देखते ही पानी ला देता है। इसीलिए इमली का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इमली सिर्फ टेस्टी ही नहीं है यह स्वाद के साथ सेहत से भी भरी है। जी हां सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह सच है इमली कई तरह के औषधीय गुणों से भरपूर है।

इमली कई पोषक तत्वों से भरपूर है जिसमें विटामिन सी, ई और बी का प्रचुरता है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैगनीज और फाइबर अच्छी मात्रा में है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी हैं।

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वजन घटाने के लिहाज से इमली का सेवन फायदेमंद है। इसमें हाइड्रोऑक्साइट्रिक एसिड की प्रचुरता है जो शरीर में फैट्स बर्न करने वाले इन्जाइम को बढ़ाता है जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

भूख लगती है

पके हुए इमली के फलों को पानी के साथ मसलकर रस तैयार किया जाता है और हल्की सी मात्रा में काला नमक डालकर सेवन किया जाए तो भूख लगने लगती है। प्रतिदिन दो बार ऐसा करने से भूख ना लगने की शिकायत दूर हो जाती है।

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पाचन प्रक्रिया को दुरुस्‍त रखें

इमली का सेवन पाचन प्रक्रिया को ठीक रखने में भी फायदेमंद होता है। इसमें फाइबर की अधिकता पाचन के लिए मददगार होती है। कब्‍ज से लेकर डायरिया जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के उपचार में इमली बहुत फायदेमंद होती है। पाचन संबंधी समस्‍या से बचने के लिए एक चम्‍मच इमली के गूदे को एक लीटर पानी में मिलाकर, इसे उबाल लें फिर छानकर इसका अर्क बनाकर पी लें।

शराब एवं भांग का नशा उतारने में

नशा समाप्त करने के लिए पकी इमली का गूदा जल में भिगोकर, मथकर, और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाना चाहिए ।

 सूजन में आराम

इमली की पत्तियों को पानी के साथ कुचलकर लेप तैयार किया जाए और जोड़ दर्द वाले हिस्सों या सूजन वाले अंगों पर लेपित करके सूती कपड़े से बांधकर रखा जाए, तो दर्द और सूजन में तेजी से आराम मिलता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली में मजबूती

एंटी-ऑक्‍सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण दोनों मिलकर इमली को मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण का अद्भुत विकल्‍प बनतो हैं। नियमित रूप से इमली के सेवन से सभी प्रकार के माइक्रोबियल संक्रमण से दूर रहने और अन्‍य संक्रमणों से लड़ने की अधिक शक्ति मिलती है।

कान की समस्या

एक व्यक्ति को अगर कान में गंभीर दर्द है,तो  तेल के साथ इमली का रस असरदार काम करता है।

वजन कम करें

अगर आप बढ़ते वजन को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो वजन घटाने के लिहाज से इमली का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें अधिक मात्रा में हाइड्रोऑक्साइट्रिक एसिड की मौजूदगी शरीर में फैट को जलाने वाले इन्जाइम को बढ़ाने में मदद करते  है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। तो वजन कंट्रोल करने के लिए आज से ही अपने आहार में इमली को शामिल करें।

जुकाम

इमली के फलो के सूप से तीव्र ठण्ड का इलाज किया जा सकता है।

सीने में जलन होने पर पकी इमली के रस में मिश्री मिलाकर पीएं सीने की जलन कम हो जाती है।

पीलिया ठीक होता है

इमली की पत्तियों और फूलों को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार किया जाता है और इस काढ़े का सेवन पीलिया से ग्रसित व्यक्ति को दिया जाता है। माना जाता है कि इस काढ़े का सेवन एक सप्ताह तक प्रतिदिन दो बार करने से काफी फायदा पहुंचता है।

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स्कर्वी

यह बीमारी विटामिन सी की कमी से होने वाला रोग है, जिससे त्वचा में धब्बे आ जाते हैं, मसूड़े स्पंजी हो जाते हैं और श्लेष्मा झिल्ली से रक्त बहता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पीला और उदास दिखता है। इमली में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह स्कर्वी के इलाज में लाभदायक है।

नर्वस सिस्‍टम में मजबूती

इमली थियामाइन से समृद्ध होती है, जो विटामिन बी कॉम्‍प्‍लेक्‍स का हिस्‍सा है। थियामाइन तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने और मांसपेशियों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है। थियामाइन का सेवन अच्छी तरह से नर्वस को रिलैक्‍स करने में मदद करता है।

दिल के लिए लाभकारी

पोटेशियम की मौजूदगी के कारण इमली ब्‍लड प्रेशर को कम करने में मदद करती है। साथ ही इमली में पाया जाने वाला  फाइबर भी कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इमली के एंटीऑक्‍सीडेंट फ्री रेडिकल्‍स को चैक में रखते है। इन सब का एक साथ होने का यानी हेल्‍दी दिल।

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पेचिश

यह आंत में सूजन होने से होता है, जिससे दस्त के मल में अत्यंत बलगम या रक्त का निकास होता है। कभी-कभार साथ में बुखार और पेट दर्द की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। इमली का पेय पेचिश के इलाज में लाभकारी है।

खाज-खुजली

इमली के बीज नींबू के रस में पीसकर लगाने से खाज दूर होती है।

जलन होने पर

सीने में जलन होने पर पकी इमली के रस में मिश्री मिलाकर पीएं सीने की जलन कम हो जाती है। ह्रदय में जलन होने पर पकी इमली का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है |

वमन (उल्टी)

  • इमली को रात में पानी में डालकर रख लें। सुबह उसे मसलकर और छानकर उस पानी में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर थोड़ा-थोड़ा सा पीने से उल्टी बंद होती है।
  • गर्मी की वजह से अगर उल्टी हो रही हो तो पकी हुई इमली को पानी में निचोड़कर छानकर पी लें। इसको पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  • वमन (उल्टी) और गर्मी के बुखार होने पर इमली का शर्बत बनाकर पीना चाहिए।
  • पकी हुई इमली को पानी में भिगोकर इसके रस को पीने से वमन (उल्टी) बंद हो जाती है।

डायबिटीज पर नियंत्रण

इमली एक अल्‍फा एमिलेज अवरोध है- यह कार्बोहाइड्रेट को शुगर में अवशोषित और परिवर्तित होने से रोकता है, जो ब्‍लड शुगर स्‍तर के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। आधा चम्‍मच इमली का गूदा प्रतिदिन लेने से न केवल आपका वजन कम होता है, बल्कि डायबिटीज भी कंट्रोल में रहती है।

Diabetes

चक्कर आना

 लगभग 25 ग्राम बिना बीज की इमली को 125 ग्राम पानी में भिगों दें। एक घंटे तक भिगोने के बाद मसल-छानकर इसमें चीनी मिलाकर सुबह और शाम को पिलाने से चक्कर आने बंद हो जाते हैं।

गठिया का दर्द दूर करें

सूजन त्‍वचा से संबंधित गंभीर समस्‍या है। यह शरीर के कई आंतरिक अंगों को प्रभावित करती है, और दर्द का कारण बनता है। लेकिन इमली सूजन के इलाज की एक बहुत अच्‍छी दवा है। जोडों में दर्द और लुब्रिकेशन के लिए आधा चम्‍मच भुने हुए इमली के बीज के पाउडर को दो बार पानी के साथ लेना चाहिए।

Arthritis

मानसिक उन्माद (पागलपन)

20 ग्राम इमली को जल के साथ पीस-छानकर पागलपन के रोगी को पिलाने से पागलपन या उन्माद दूर हो जाता है।

बवासीर

इमली का रस निकाल कर जिनको खुनी बवासीर हो उन्हें दोनोंसमय पिलाने से उनको बवासीर में राहत मिलती है और बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाता है

दाद

इमली के बीच को नींबू के रस में घिसकर दाद पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

हानिकारक प्रभाव

कच्ची इमली भारी, गर्म और अधिक खट्टी होती है। जिन्हें इमली अनुकूल नहीं होती है, उन्हें भी पकी इमली से दान्तों का खट्टा होना, सिर और जबडे़ में दर्द, सांस की तकलीफ, खांसी और बुखार जैसे दुष्परिणाम हो सकते हैं।

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