कुछ सरल एवं घरेलू उपाय आपको सदा स्वस्थ रहनेमें काफी मददगार हो सकते हैं जिनकी चर्चा हम नीचे कर रहें हैं –

हमेशा उचित मात्रा में ही भोजन करें

सदैव उचित मात्रा में भोजन करना उत्तम स्वास्थ्य का प्रथम नियम है। इसके लिए सबसे पहले यह पता लगा लें कि आपके शरीर को कितनी मात्रा में भोजन चाहिए। जितना भोजन करने से शरीर में आलस्य न हो, भारीपन न हो, सिर भारी न हो तथा पेट तना-तना सा नही लगे, उतना भोजन लेना स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वथा उपयुक्त रहता है।

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सुबह की सैर कभी न छोड़े

सैर के लिए प्रात:काल का समय सर्वोत्तम है। इस समय वातावरण आनंददायक तो होता ही है, साथ ही वायु भी प्रदूषण व हानिकारक गैसों के प्रभाव से मुक्त होती है। प्रातः की सैर यदि हरी घास पर नंगे पांव की जाए तो सर्वोत्तम है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है तथा थकान का अनुभव नहीं होता, नेत्रज्योति भी बढ़ती है।

कभी कुछ कच्चा खाएं

भोजन को अधिक पकाने से उसके पोषक तत्त्व समाप्त हो जाते हैं। कई बार तो लोग सब्जी या अन्य खाई वस्तु को बार-बार गर्म करके खाते हैं, यह हानिकरक है। इससे जहां तक संभव हो बचे तथा कुछ फलों या सब्जियों को कच्चा ही खाने की आदत डालें। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह काफी लाभकारी सिद्ध होगा।

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भोजन निश्चित समय पर करें

जहां तक संभव हो भोजन का समय निश्चित रखें। दो भोजनों के बीच कम-से-कम पांच घंटे का अंतराल अवश्य रखें तथा इस समय में पानी या फलों के रस के सिवा और कुछ न लें।

सही अन्तराल पर उपवास जरूर करें

उपवास स्वस्थ रहने का उपयुक्त माध्यम है। इससे शरीर को आराम मिलता है तथा सारे शरीर की आंतरिक सफाई होती है। समय-समय पर एक-दो दिन का उपवास करना साधारण रोगों के साथ-साथ अनेक असाध्य रोग जैसे बवासीर, मधुमेह इत्यादि में भी लाभकारी है। कब्ज या अपच में तो उपवास से चमत्कारी लाभ होता है। इसी प्रकार कभी-कभी एक-दो दिन केवल रसदार फल खाकर रहना चाहिए। इससे भी चमत्कारिक रूप से स्वास्थ्य लाभ होता है।

उचित मात्रा में पानी पीएँ

जल को जीवन का आधार माना जाता है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन कम-से-कम ढाई-तीन लीटर पानी पीना चाहिए। भोजन के बीच में पानी पीना बहुत हानिकारक है क्योंकि इससे पाचक तत्त्व पतले हो जाते हैं और उनका प्रभाव कम हो जाता है। भोजन का पाचन व उसमें से पोषक पदार्थों का अवशोषण पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। सलाह तो यहां तक दी जाती है कि भोजन करने के पश्चात दो घंटे तक पानी न पीया जाए। सुबह उठते ही लगभग आधा लीटर शीतल जल पीना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। इससे शौच साफ होता है। इस जल में नीबू का रस भी डाला जा सकता है। सोते समय भी इतना ही पानी पीना चाहिए।

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भूख लगने पर ही खाना खाएं

स्वास्थ्य की असली कसौटी भूख है, समय होने पर भी यदि भूख न लगे, खाना खाने की इच्छा न हो तो उस समय भोजन छोड़ दीजिए। भूख उस समय लगती है जब पूर्व में किया भोजन पच जाता है तथा पाचन संस्थान पाचक एंजाइमों का स्रवण करने लगता है। यदि भूख से पहले ही भोजन कर लिया जाए तो भोजन कठिनाई से तथा बहुत देर में पचता है तथा कुछ अपच भी रह सकता है, जिससे पेट में कई प्रकार की गड़बड़ियां हो जाती हैं जो अस्वस्थता का कारण बनती हैं।

मालिश, धूप व व्यायाम आवश्यक है

धूप, मालिश व व्यायाम शरीर के लिए जरूरी है। सर्दी में यथासंभव रोज, गर्मी में हफ्ते में एक-दो बार सारे शरीर की मालिश सरसों के तेल से करें। मालिश के बाद बदन पर लगभग 30 मिनट तक सूर्य की किरणे पड़ने दें। सिर पर गीला या सूखा तौलिया रखकर उसे धूप से बचाएं इसके पश्चात 15 मिनट बाद ही स्नान करें। साबुन के स्थान पर आंवले के चूर्ण या चने के बेसन का उपयोग करें तो बेहतर होगा। स्वास्थ्य के साथ-साथ मालिश सौंदर्यवर्धन में भी सहायक होती है।

शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए व्यायाम भी उतना ही जरूरी है जितना भोजन व पानी। नियमित व्यायाम से कई साधारण रोग जैसे अपच, कब्ज, आलस्य व अनिद्रा आदि स्वतः ही दूर हो जाते हैं। इससे त्वचा के रोमकूप खुल जाते हैं तथा पसीना आने से शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। इसके अलावा व्यायाम से हृदय संवहन नलिकाओं को बल मिलता है, जिससे हृदय रोगों से बचाव होता है तथा प्रसव पीड़ा, अस्थमा, मधुमेह, गठिया, कमरदर्द, मोटापा, मानसिक तनाव व पेट के रोगों में राहत मिलती है।

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